केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में रिटायर्ड लोगों को 'कन्सलटेंट' की जॉब खूब मिल रही हैं। कई जगहों पर तो ऐसा भी देखने को मिलता है कि रिटायरमेंट के दो-तीन दिन बाद ही नई जॉब यानी 'कन्सलटेंट' का नियुक्ति पत्र मिल जाता है। इस जॉब के लिए अधिकतम आयु सीमा 62-65 वर्ष रखी गई है। इस कड़ी में अब पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) भी शामिल हो गया है। इन दिनों बीपीआरएंडडी में जमकर वैकेंसी निकली हैं। योग्यता तय करने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है। यानी जो योग्यता, स्थायी उम्मीदवारों के लिए होती है, वहीं अनुबंध आधार पर नियुक्ति पाने वालों के लिए निर्धारित की गई है। आधा वेतन पाने वाले रिटायर्ड पर्सन, पुलिस/सुरक्षा बलों के लिए बैलिस्टिक से लेकर ट्रैफिक व बिल्डिंग सहित अन्य पॉलिसी बनाएंगे। एक माह में डेढ़ छुट्टी मिलेगी और कोई वेतन वृद्धि या आवास की सुविधा नहीं दी जाएगी।
पांच वर्ष बाद तक चल सकती है नौकरी
बीपीआरएंडडी में कई पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई हैं। कहा गया है कि ये वैकेंसी उस वक्त तक हैं, जब तक उस पद पर कोई स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती। हालांकि विज्ञापन में कहा गया है कि ये नौकरी, 31 अगस्त 2025 तक हैं, लेकिन अनुबंध को आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर कामकाज ठीक रहता है तो नियुक्ति को 65 साल तक या सेवानिवृत्ति के पांच वर्ष बाद तक बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल बीपीआरएंडडी ने आवेदन की अंतिम तारीख 15 नवंबर रखी है। बीपीआरएंडडी मुख्यालय के लिए प्रिंसिपल साइंटिफिक अफसर (ट्रैफिक/ट्रांसपोर्ट), प्रिंसिपल साइंटिफिक अफसर (बिल्डिंग एंड डिजाइन), प्रिंसिपल साइंटिफिक अफसर (बैलिस्टिक एंड एक्पलोसिव), प्रिंसिपल साइंटिफिक अफसर (लाइफ साइंस) और प्रिंसिपल साइंटिफिक अफसर (यूनिफॉर्म एंड अकूटर्मन्ट्स) के पद अनुबंध आधार पर रिटायर्ड लोगों के द्वारा भरे जाएंगे।
साइंटिफिक अफसर से डीएसपी व सिपाही तक
इसके अलावा असिस्टेंट डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर (लीगल), सीनियर साइंटिफिक अफसर (लाइफ साइंस), सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट (बिल्डिंग), सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट (आपरेशनल रिसर्च), स्टेनो/पीए, लीगल असिस्टेंट, स्टेनो ग्रेड 2, लाइब्रेरी असिस्टेंट व कैंटीन असिस्टेंट के पद को भी रिटायर्ड लोगों से भरा जाएगा। सीएपीटी भोपाल के लिए भी सहायक निदेशक के पद को अनुबंध आधार पर भरा जाएगा। ट्रेनिंग अफसर, स्टेनो ग्रेड 2, ड्रिल अनुदेशक, प्रोग्रामर कंप्यूटर, आपरेटर व भाषा इंटरप्रेटर के पद पर भी रिटायर्ड लोग काम करेंगे। सीडीटीआई जयपुर के लिए साइबर एक्सपर्ट, इंस्पेक्टर, सिपाही और स्टाफ कार चालक के पदों पर भी रिटायर्ड लोग लगाए जाएंगे। सीडीटीआई गाजियाबाद, में डीएसपी व स्टाफ कार ड्राइवर और सीडीटीआई चंडीगढ़ के लिए इंस्पेक्टर, एलडीसी व मल्टी टॉस्किंग स्टाफ भी अनुबंध पर भर्ती किए जाएंगे। सीडीटीआई हैदराबाद में डीएसपी व सीडीटीआई कोलकाता में डीएसपी, इंस्पेक्टर, स्टाफ कार ड्राइवर और सिपाही, ये पद भी रिटायर्ड पर्सन के जरिए रखे जाएंगे।
नहीं मिलेगी वेतन वृद्धि और आवास
सभी पदों के लिए उच्च श्रेणी की योग्यताएं तय की गई हैं। खास बात है कि इन नियुक्तियों के लिए केवल वही रिटायर्ड कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं, जिन्हें फुल पेंशन मिलती है। कम वेतन पर रिटायर होने वाले कर्मचारी इन पदों के लिए आवेदन न करें। एक बार नियुक्त होने के बाद अनुबंध आधारित जॉब 65 वर्ष की आयु तक चल सकती है। लास्ट सेलरी में से बेसिक पेंशन घटाकर वेतन दिया जाएगा। अगर नियुक्ति पाने वाला कर्मचारी, एनपीएस में रिटायर हुआ है तो उसे लास्ट बेसिक सेलरी का तीस फीसदी काटकर वेतन दिया जाएगा। वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी। आवास की सुविधा भी नहीं होगी। एक माह में डेढ़ दिन की छुट्टी दी जाएगी। एचआरए भी नहीं मिलेगा। घर से दफ्तर तक टीए दिया जाएगा। जो वेतन दिया जाएगा, उस पर टीडीएस कटेगा। 15 दिन के नोटिस पर कभी भी नौकरी से निकाला जा सकता है।
नियमित भर्ती न कर, अपना खर्च बचा रही सरकार
जानकारों का कहना है कि इस तरह की जॉब का फायदा, दो लोगों को ही होता है। एक तो सरकार, जिसका खर्च बच जाता है तो दूसरा रिटायर्ड व्यक्ति, जो पेंशन लेते हुए दोबारा से जॉब पा जाता है। हिन्द मजदूर सभा के राष्ट्रीय महामंत्री कॉमरेड हरभजन सिंह सिद्धू के अनुसार, सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। कर्मचारियों के साथ लेबर की तरह एमओयू साइन कर लेती है। नियमित भर्ती न कर, अपना खर्च बचा रही है। जो युवा नौकरी के इंतजार में बैठे हैं, उनका भविष्य शुरु होने से पहले ही बर्बाद किया जा रहा है। सरकार, पेंशन व दूसरे लाभ देने से बच रही है। नियमित जॉब न देकर एडवाइजर व कन्सलटेंट भर्ती कर रही है। सरकार का यह कदम युवाओं पर कुठाराघात करने वाला है। केंद्र सरकार के गृह, रक्षा, वित्त, कृषि, जल, परिवहन, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, पावर मंत्रालय, एनसीएसके, स्टाफ सिलेक्शन कमीशन, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन, कॉमर्स मंत्रालय व उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) सहित तकरीबन सभी मंत्रालयों/विभागों में कन्सलटेंट नियुक्त किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के विभिन्न आयोगों व संगठनों में भी अनुबंध आधारित भर्ती करने का यही तरीका अपनाया जा रहा है।
नियमित भर्ती से पीछे खींचे जा रहे कदम
हिन्द मजदूर सभा के राष्ट्रीय महामंत्री कॉमरेड हरभजन सिंह सिद्दू बताते हैं, सरकार की नीयत में खोट है। जानबूझ कर नियमित भर्ती नहीं कर रही। कई वर्षों से नियमित भर्ती से कदम पीछे खींचे जा रहे हैं। ऐसे लोगों की निष्ठा, संगठन के प्रति न होकर उस व्यक्ति के प्रति होती है, जिसने उन्हें कन्सलटेंट भर्ती किया है। केंद्र सरकार में लाखों पद खाली पड़े हैं। उन्हें भरा नहीं जा रहा। सरकार को वर्कलोड के मुताबिक स्थायी नियुक्ति करनी चाहिए। सरकार बजट बढ़ने का बहाना बनाकर नियमित नौकरियों पर कैंची चला रही है। कन्सलटेंट की जॉब, नियमित नौकरी में कटौती का एक ताजा उदाहरण है। सरकार, समय पर भर्ती करने में असफल रही है। इसके बाद बजट कम होने की बात कह देती है। एडवाइजर या कन्सलटेंट लगने के लिए सरकारी कर्मचारी, चापलूसी व प्रलोभन का काम करने लगते हैं। उन्हें कन्सलटेंट लगने से पहले भी बॉस को खुश रखना है। नियुक्त होने के बाद भी बॉस को नाराज नहीं कर सकते।
बॉस खुश रहे तो चार पांच वर्ष तक नौकरी
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी.श्रीकुमार ने कन्सलटेंट की नियुक्ति को बहुत खराब प्रक्रिया बताया है। इसमें कन्सलटेंट को उतना वेतन दिया जाता है, जो सरकारी कर्मी को जारी अंतिम वेतन के पचास प्रतिशत से ज्यादा नहीं होता। रिटायरमेंट के बाद दोबारा से नियुक्ति लेने वालों का भाव, विभाग के प्रति नहीं रहता है। पोस्ट रिटायरमेंट जॉब लेने के लिए काफी समय पहले से ही प्रयास शुरु हो जाते हैं। अगर बॉस खुश रहे तो तीन चार वर्ष तक नौकरी हो जाती है। केंद्र सरकार के एक अधिकारी बताते हैं कि जब किसी विभाग में कन्सलटेंट लगाए जाते हैं तो वहां पर वैकेंसी रिपोर्ट नहीं की जाती। अगर वे ऐसा करते हैं तो उनसे पूछा जाएगा कि कन्सलटेंट को क्यों रखा गया है। उस वक्त कन्सलटेंट का पद रिक्त माना जाएगा। ये जानकारी सभी को होती है कि किस विभाग में कौन व्यक्ति, कब रिटायर होगा। उससे पहले ही भर्ती प्रक्रिया शुरु होनी चाहिए, ताकि संबंधित व्यक्ति के रिटायर होते ही वह पद दोबारा से स्थायी तौर पर भरा जा सके। हालांकि व्यवहार में ऐसा नहीं होता है। तकनीकी पदों के लिए तो कन्सलटेंट की भर्ती समझ आती है। वह भी उस वक्त, जब उसके स्पेशलाइजेशन का कोई विकल्प न हो। वह पद सृजित नहीं हो सका हो। ऐसे में जीएफआर के नियम, कन्सलटेंट भर्ती की इजाजत देते हैं।
नियमित पोस्ट नहीं तो कई स्तर पर होता है नुकसान
केंद्रीय विभागों में जो कन्सलटेंट भर्ती किए जा रहे हैं, वे खुली प्रतियोगिता से नहीं आते। अधिकांश विभागों में वही लोग दोबारा से नियुक्त हो जाते हैं, जो वहां से रिटायर हुए हैं। इन पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरा जाना चाहिए। केंद्र सरकार में अंडर सेक्रेटरी स्तर के एक अधिकारी का कहना है, सरकार, नियमित पोस्ट क्यों नहीं ला रही है। सरकार तो कन्सलटेंट रखकर अपना बजट बचा लेती है, लेकिन उसका नुकसान कई स्तर पर होता है। तीन चार साल तक कन्सलटेंट ही रहेगा तो नए कर्मी को उस पद का अनुभव कब प्राप्त होगा। सरकार एक ही बार में सैंकड़ों वैकेंसी ले आएगी। इससे जो लोग पहले से काम रहे हैं, उनके लिए पदोन्नति का संकट खड़ा होगा। ऐसे में बेहतर है कि जो पद खाली हो, उसे तुरंत नियमित भर्ती के जरिए भर दिया जाए। इसके लिए वित्त मंत्रालय आदि से जो मंजूरी चाहिए, वह पहले ही ले ली जाए। कई विभागों में वैकेंसी पड़ी रहती हैं, लेकिन वहाँ पदोन्नति नहीं दी जाती। कम से कम एडहॉक पदोन्नति ही दे दें। अगर किसी विभाग में औसतन सौ रिक्त पद होते हैं तो वहां 20 प्रतिशत पदों को कन्सलटेंट से भर लेते हैं। ये गलत प्रक्रिया है। ऐसी व्यवस्था हो कि एक कर्मी रिटायर हो तो कुछ ही दिन में दूसरा कर्मी ट्रेनिंग कर उस पद को संभाल ले।
नहीं मिलेगा अतिरिक्त कार्य का पैसा
केंद्र सरकार में 65 वर्ष की आयु वाले रिटायर्ड लोगों को नौकरियां मिल रही हैं। इससे सरकार अपना खर्च बचा रही है। लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा या मेडिकल, इन सबकी जरुरत भी नहीं पड़ती। एक माह में डेढ़ छुट्टी मिलती है। महंगाई भत्ते आदि नहीं दिए जाते। नौकरी के लिए लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ता। महज एक सप्ताह से लेकर तीस दिन के भीतर नियुक्ति पत्र मिल जाता है। विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों से सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों और कर्मियों को अनुबंध आधार पर नौकरी मिल जाती है। रिक्त पदों में निदेशक, सलाहकार और निजी सहायक से लेकर दूसरे कई तरह के तकनीकी एवं गैर तकनीकी पद शामिल हैं। सेवा विस्तार, परफॉरमेंस पर निर्भर करता है। टीए-डीए केवल दफ्तर के कार्य के लिए प्रदान किया जाएगा। नो वर्क, नो पे का नियम लागू होता है। अनुबंध नियुक्ति वाले व्यक्ति को महंगाई भत्ता, एचआरए, पीएफ, पेंशन, बीमा, मेडिकल अटेंडेंस ट्रीटमेंट और वरिष्ठता आदि लाभ नहीं मिलते। जॉब का समय सुबह नौ बजे से लेकर शाम साढ़े पांच बजे तक होगा। अतिरिक्त कार्य का पैसा नहीं मिलेगा। जॉब के दौरान गोपनीयता बनाए रखनी होगी। इन सबके बावजूद, प्राधिकृत अथॉरिटी द्वारा उस व्यक्ति को कभी भी पंद्रह-बीस दिन का नोटिस देकर नौकरी से हटाया जा सकता है।