उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में जरूरी है कि इन अनुच्छेदों को खत्म कर दिया जाए क्योंकि उस कानून के तहत दी गई कुछ स्वायत्तता अन्य राज्यों के अधिकारों के विपरीत है। अगर कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो इसका दर्जा अन्य राज्यों के बराबर ही होना चाहिए।
कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त ने कहा, ‘70 वर्ष बीत चुके हैं... मेरे मुताबिक उन अनुच्छेदों का जो उद्देश्य था वह पूरा हो गया है।’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं है। इसलिए इन दोनों अनुच्छेदों का अब संविधान में कोई स्थान नहीं रह गया है।’
बता दें कि अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है। वहीं, अनुच्छेद 35ए उस राज्य में बाहरी लोगों को जमीन एवं संपत्ति खरीदने से रोकता है।