उच्च ब्याज दरों के बावजूद 2023 खुदरा कर्ज का साल रहा है। महंगाई के दौर में अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लोगों ने कर्ज लिए, जिससे खुदरा कर्ज बढ़कर इस साल 45,51,584 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह आंकड़ा 2022 के 38,55,873 करोड़ से 18.04 फीसदी ज्यादा है। लेकिन, खुदरा कर्ज में वृद्धि की रफ्तार पिछले साल की तुलना में कम है। उस दौरान 2021 के 31,99,948 करोड़ रुपये के मुकाबले 20.5 फीसदी अधिक खुदरा कर्ज बंटे थे।
बैंक बाजार की 'मनीमूड' रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 45.51 लाख करोड़ के खुदरा कर्ज में होम लोन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 47.11 फीसदी रही है। पर्सनल लोन की 26.66 फीसदी, ऑटो लोन की 12.15 फीसदी, क्रेडिट कार्ड की 5.29 फीसदी और एजुकेशन लोन की 2.43 फीसदी रही है। लोगों ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) व अन्य संपत्तियां गिरवी रखकर भी कर्ज लिए हैं। एफडी के एवज में कर्ज का योगदान 2.50 फीसदी रहा। गोल्ड लोन की 2.20 फीसदी और शेयर-बॉन्ड गिरवी रखकर कर्ज लेने की हिस्सेदारी 0.17 फीसदी रही है।
- क्रेडिट कार्ड, पर्सनल, शिक्षा व ऑटो लोन में 20 फीसदी से अधिक वृद्धि
- होम लोन: 2023 में होम लोन का औसत आकार 28.19 लाख रुपये रहा।
- मेट्रो शहर : औसत होम लोन का आकार 33.10 लाख रुपये।
- गैर-मेट्रो शहर : औसत आकार 22.81 लाख रुपये।
- 2024 में क्या : महंगाई दर में गिरावट और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से होम लोन की मांग नई ऊंचाई पर पहुंच सकती है।
पर्सनल लोन
- एक व्यक्ति ने कम-से-कम 1.71 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया।
- महिलाओं में पर्सनल लोन का औसत आकार 1.75 लाख, जबकि पुरुषों में यह 1.70 लाख रुपये रहा।
- 2024 में क्या : आरबीआई की सख्ती से कर्ज पर असर पड़ेगा। फिर भी, छोटे कर्ज की मांग रहेगी।
क्रेडिट कार्ड
- क्रेडिट कार्ड से 1.79 लाख करोड़ खर्च।
- क्रेडिट कार्ड संख्या नवंबर तक बढ़कर 9.47 करोड़।
- 2024 में क्या : असुरक्षित कर्ज पर सख्ती से क्रेडिट कार्ड की मांग और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।