अटल बिहारी सरकार में मंत्री रह चुके सिन्हा ने कहा, ‘तृणमूल (पश्चिम बंगाल) का तेदेपा (आंध्र प्रदेश) और द्रमुक (तमिलनाडु) के साथ कोई टकराव नहीं है। यह संभावना है कि क्षेत्रीय दलों को भाजपा के मुकाबले अधिक सीटें मिल सकती हैं। क्षेत्रीय दलों का कांग्रेस के साथ तालमेल होना चाहिए। चुनाव के बाद वह सरकार गठन के लिए साथ आ सकते हैं।’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस भले ही तीन राज्यों में विधानासभा चुनाव जीत गई है लेकिन उसे खुद को विपक्षी गठबंधन का नेता घोषित करने की गलती नहीं करना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने मोदी के जादू की निराधार धारणा को तहस-नहस कर दिया है। इससे विपक्षी दल अगले लोकसभा चुनाव में एक दूसरे के साथ बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे।
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी कौन थे? वह एक राज्य के मुख्यमंत्री थे। विपक्षी दलों में ऐसे कई नेता हैं जो मुख्यमंत्री या मंत्री रह चुके हैं।’ बता दें कि सिन्हा ने इस वर्ष की शुरुआत में पार्टी छोड़ दी थी।