होटल, रेस्त्रां में सर्विस चार्ज को लेकर कुछ दिन पहले उपभोक्ता मंत्रालय की ओर से गाइडलाइंस जारी की गई थी कि बिल में जुड़ने वाला सर्विस चार्ज देना या नहीं देना उपभोक्ता की मर्जी पर होगा। लेकिन अब इस मामले में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने नरम रुख अपनाते हुए रविवार को कहा कि रेस्टोरेंट जो सर्विस चार्ज लेते हैं वे कहते हैं कि उसमें से कुछ हिस्सा वे सर्विस स्टाफ को भी देते हैं। उन्होंने कहा कि इस पर गौर किया जाना चाहिए। वहीं, उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा कि ग्राहक की सहमति के बिना चार्ज करना अनुचित होगा।
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गौरतलब है कि इससे पहले पीएमओ से आदेश मिलने के बाद उपभोक्ता मंत्रालय ने नई गाइ़डलाइंस जारी की थी। इसमें कहा गया था कि बाहर खाने पर बिल में जुड़ने वाले सर्विस चार्ज देना या नहीं देना उपभोक्ता की मर्जी पर होगा। अगर उपभोक्ता सर्विस चार्ज नहीं देना चाहता है तो होटल और रेस्त्रां इसको लेकर के ग्राहक को बाध्य नहीं कर सकेंगे। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने इसकी घोषणा की थी।
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इससे पहले जनवरी में भी सरकार की तरफ से उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा था कि होटल,कंपनी और रेस्त्रां चलाने वाले सर्विस चार्ज देने के लिए ग्राहकों को बाध्य नहीं कर सकेंगे।
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केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि कोई भी कंपनी, होटल या रेस्त्रां ग्राहकों से जबर्दस्ती सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकता। मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों से कहा कि वह कंपनियों, होटलों और रेस्त्रां को इस बारे में सचेत कर दें।
उपभोक्ताओं की सर्विस चार्ज को लेकर काफी शिकायतें रहती हैं। होटल और रेस्त्रां टिप्स के रूप में 5 से 20 प्रतिशत तक 'सर्विस चार्ज' लगाते हैं जिसका भुगतान करने का दबाव उपभोक्ताओं पर बनाया जाता है, जिसका सर्विस की कैटिगरी से कोई लेना-देना नहीं होता है।'