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शाह ने अनुच्छेद 370 को हटाने का विधेयक किया पेश, पीडीपी सांसदों ने फाड़ा संविधान

Mon, 05 Aug 2019 01:09 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीडीपी सांसद ने अपना कुर्ता और संविधान फाड़ा - फोटो : ANI
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राज्यसभा में सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को हटाने का प्रस्ताव दिया। जिसके बाद विपक्षी नेताओं ने संसद में हंगामा करना शुरू कर दिया। विपक्षी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में युद्ध जैसा माहौल बनाया गया और राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को नजरबंद किया गया है। इसी बीच अपना विरोध जताते हुए पीडीपी के दो सासंदों में से एक मीर फयाज ने अपना कुर्ता फाड़ लिया। इसके अलावा दोनों सासंदों ने भारत के संविधान को भी फाड़ने की कोशिश की।

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पीडीपी सासंद की इस हरकत से नाराज होकर राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने मीर फयाज और नजीर अहमद को सदन से जाने के लिए कहा गया। कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने पीडीपी सांसदो के संविधान फाड़ने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'हम संविधान के साथ खड़े हैं। हम हिंदुस्तान के संविधान की रक्षा के लिए जान की बाजी लगा देंगे लेकिन आज भाजपा ने संविधान की हत्या कर दी।' 
 


वहीं आजाद ने शाह से राज्यसभा में बिल पेश करने से पहले उन्हें कश्मीर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए कहा। जिसपर शाह ने कहा कि मैं कश्मीर पर बयान देने के लिए तैयार हूं। मैं आपके सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हूं। मुझे बोलने का मौका दीजिए। शाह ने राज्यसभा में भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड 1 के सिवा इस अनुच्छेद के सारे खंडों को रद्द करने की सिफारिश की। 
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उन्होंने राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की सिफारिश की। कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में जम्मू-कश्मीर होगा जहां विधानसभा होगी वहीं दूसरे हिस्से में लद्दाख होगा। जो पूरी तरह से एक केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां विधानसभा नहीं होगी। इसके अलावा उन्होंने राज्य के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी पेश किया।

गृह मंत्री ने कहा, 'अनुच्छेद 370 की आड़ में तीन परिवारों ने जम्मू-कश्मीर को सालों तक लूटा। विपक्षी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को भारत से जोड़ती है। यह सच नहीं है। महाराजा हरि सिंह ने  27 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। वहीं अनुच्छेद 370 1954 में आया।'

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