तीनों आपराधिक कानूनों में बदलाव के विरोध में पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को एक प्रस्ताव पारित किया गया। भाजपा के सदस्यों ने इसका विरोध किया। लेकिन प्रस्ताव 42 के मुकाबले 101 मतों से पारित हो गया। प्रस्ताव में केंद्र की ओर से संसद में पेश किए गए तीनों संशोधन विधेयकों के खिलाफ आम सहमति बनाने की मांग की गई है।
प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए राज्य के कानून मंत्री मलय घटक ने केंद्र के कदम की आलोचना की और प्रस्तावित नए विधेयकों को पुराने कानूनों की तुलना में कठोर बताया। उन्होंने कहा, यदि यह संसद में पास हो गया तो यह देश के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर देगा। वहीं, भाजपा के विष्णु प्रसाद शर्मा ने कहा कि विधानसभा में सभी सदस्यों को विधेयक का विरोध करने की बजाय उस पर सकारात्मक चर्चा करनी चाहिए और केंद्र को अपने सुझाव देने चाहिए।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार भारतीय दंड संहिता (आइपीसी), आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के स्थान पर तीन विधेयक क्रमश: भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लेकर आई है। अगस्त में इन विधेयकों को संसद में पेश किया था, जिसके मौजूदा सत्र में पारित होने की संभावना है।