फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संक्रमण रोकने को लेकर हर्ड इम्युनिटी की व्यवहारिकता पर शोधकर्ताओं को संदेह

Wed, 08 Jul 2020 07:32 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए ‘हर्ड इम्युनिटी’ की व्यवहारिकता को लेकर शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में संदेह जताया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर्ड इम्युनिटी वह स्थिति होती है जब काफी सारे लोग संक्रमित हो जाते हैं और अन्य लोगों में संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। इसके लिए कम से कम 70 फीसदी में आबादी में रोग प्रतिरक्षा तंत्र विकसित होना आवश्यक है।

विज्ञापन


द लांसेट जर्नल में प्रकाशित स्पेनिश अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने 60 हजार लोगों पर अध्ययन कर यह पाया कि महज पांच फीसदी लोगों में ही एंटीबॉडी तैयार हुई। आबादी के आधार पर अध्ययन का मकसद स्पेन में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर सीरोलॉजी के आधार पर कोरोना वायरस संक्रमण की मौजूदगी का आकलन करना था।

इस अध्ययन के लिए 35,883 घरों को चुना गया। 27 अप्रैल से 11 मई के बीच 61,075 लोगों ने वायरस संक्रमण के लक्षणों व जोखिम को लेकर जवाब दिए। शोधकर्ताओं ने दो तरह की जांच का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि प्वाइंट ऑफ केयर टेस्ट में सीरो की मौजूदगी पांच फीसदी और इम्युनिटी जांच में इसकी मौजूदगी 4.6 फीसदी थी।
विज्ञापन


हालांकि भौगोलिक आधार पर कुछ अंतर देखने को मिला। जहां राजधानी मैड्रिड में इसका स्तर 10 फीसदी से अधिक था, वहीं तटीय इलाकों में यह तीन फीसदी से नीचे थे।

शोधकर्ताओं ने कहा, नतीजों से पता चलता है कि स्पेन की ज्यादातर आबादी में कोरोना संक्रमण के लिए सीरो का परिणाम नकारात्मक रहा। ये नतीजे जाहिर करते हैं कि महामारी की नई लहर से बचने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जरूरत है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें