वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों ने इन जीनों की पहचान के लिए 10 लाख से ज्यादा लोगों पर अध्ययन किया। इनमें 10,25,550 लोग यूरोपीय वंश के थे, जबकि 92,630 अफ्रीकी वंशावली से शामिल किए गए।
खास मादक पदार्थ, व्यवहार या चीज की लत यानी व्यसन विकार (एडिक्शन डिसऑर्डर) के पीछे असल में 66 खास जीन जिम्मेदार हैं। इनमें से 47 जीन मादक पदार्थों (शराब, निकोटिन, गांजा-भांग आदि) से जुड़े व्यसनों से जुड़े हैं, जबकि 19 व्यवहार व वस्तुओं से जुड़े व्यसन विकारों के लिए जिम्मेदार हैं। दिलचस्प बात यह है कि सभी तरह के व्यसन विकारों के पीछे डोपामाइन नियंत्रित करने वाले जीनों की मौजूदगी दिखी है।
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वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों ने इन जीनों की पहचान के लिए 10 लाख से ज्यादा लोगों पर अध्ययन किया। इनमें 10,25,550 लोग यूरोपीय वंश के थे, जबकि 92,630 अफ्रीकी वंशावली से शामिल किए गए।
प्रमुख अध्ययनकर्ता एलेक्जेंडर हतौम के मुताबिक यह नतीजे पदार्थ और व्यवहार संबंधी व्यसन विकारों के उपचार में मददगार साबित होंगे। खासतौर पर इन नजीतों का इस्तेमाल मौजूदा दवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है। अध्ययन को हाल ही में नेचर मेंटल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
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अध्ययन में लोगों के जीनोमिक डाटा की मदद से ऐसे पैटर्न तैयार किए गए हैं, जिनके आधार पर मानसिक और शारीरिक बीमारियों के जोखिमों का अनुमान लगाया जा सकता है, इनमें मानसिक विकार, आत्मघाती व्यवहार, श्वसन रोग, हृदय रोग और पुराने दर्द की स्थिति भी शामिल हैं। अध्ययन के मुताबिक मादक द्रव्यों का इस्तेमाल करने वाले माता-पिता के 9-10 वर्ष के बच्चों में मादक द्रव्यों के सेवन के बिना ही व्यावहारिक विकार दिख सकते हैं।
व्यसन विकार वंशानुगत
अध्ययन में दावा किया गया है कि मादक द्रव्यों के सेवन से जुड़े व्यसन वंशानुगत होते हैं और कई जीनों व पर्यावरणीय कारकों के बीच की जटिल अंतःक्रियाओं से प्रभावित होते हैं। पूरे जीनोम में व्यसनों से जुड़े खास जीनों को पहचानने के लिए सिंगल-न्यूक्लियोटाइड पॉलीमॉर्फिज्म (एसएनपी) का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन के मुताबिक मस्तिष्क में डोपामाइन संकेतों के नियंत्रण की आनुवांशिक भिन्नता व्यसनों के जोखिम के केंद्र में है।