देश 26 जनवरी को 69वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। स्वाधीनता के बाद देश में तमाम उतार-चढ़ाव हुए। इतने दिन के लंबे सफर में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में अनेकों उपलब्धियां हासिल की। स्वाधीनता के बाद से अब तक देश के विकास में महिलाओं का योगदान किसी से छिपा नहीं है।
यह योगदान किसी एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि तमाम हर संभव सेक्टर में गिनाए जा सकते हैं। चाहे वो रक्षा के क्षेत्र में हो या खेल अथवा प्रबंधकीय-प्रशासकीय क्षेत्र में। तो आइये जानते हैं गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर खेल में महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनकी वीरगाथाः
देश में यदि महिला खिलाड़ियों की बात करें तो खेल के अलग-अलग क्षेत्रों में खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा है। बैडमिंटन में साइना नेहवाल, पीवी सिंधु, कुश्ती में साक्षी मलिक, मुक्केबाजी में मैरी कॉम, क्रिकेट महिला टीम, हॉकी महिला टीम, ओलंपिक या अन्य। हर जगह महिलाओं ने अपने हिसाब से देश का परचम लहराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
इससे सब से प्रफुल्लित होकर देश का खेल मंत्रालय भी अब इस ओर सजग हुआ है और खिलाड़ियों को मदद पहुंचाने का भरसक प्रयास कर रहा है। इसके इतर देश में महिला खिलाड़ियों की वीरगाथा और सुरक्षा को भी ध्यान में रखकर सरकार को एक बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है और इस पर ध्यान देने की पुरजोर जरुरत है। यह इसलिए कि देश में महिला खेल के क्षेत्र में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं और देश के लिए मैडल लाने में कामयाब हो रही हैं।
मालूम हो कि हाल ही में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के गोरागांव स्थित परिसर की 25 साल की वाटर स्पोर्ट्स की एक महिला खिलाड़ी ने साई के ही एक साथी खिलाड़ी पर कथित तौर पर अश्लील वीडियो बनाकर तीन साल तक शारीरिक शोषण और परेशान करने के आरोप लगाए थे।
दरअसल, साई की महिला खिलाड़ी ने एक अन्य खिलाड़ी सुनील के खिलाफ हरियाणा के रोहतक स्थित महिला थाने में उनके साथ जबर्दस्ती करने की शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद वहां की पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। पुलिस के मुताबिक ये दोनों खिलाड़ी रोहतक के रहने वाले थे और साल 2013 में अपने-अपने खेल में कोर्स करने के लिए भोपाल साई में आये थे।
दोनों का कोर्स पूरा होने के बाद दोनों रोहतक वापस चले गए। पुलिस ने बताया कि शिकायत के मुताबिक ये दोनों पिछले तीन साल से एक दूसरे के संपर्क में थे और वहीं, सुनील शादी का झांसा देकर महिला खिलाड़ी का शारीरिक शोषण कर रहा था।
बहरहाल, इस तरह की उक्त बातों पर सरकार को ध्यान रखना होगा। वहीं, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को भी इसके प्रति जिम्मेदारी लेने की जरुरत है। यदि इस तरह के हालाज रहेंगे तो जाहिर सी बात है कि महिला खिलाड़ी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने से कतराएंगे।