26 जनवरी को देश 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर अमर उजाला महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामले को देश के सामने लेकर आ रहा है। रेप किसी भी समाज में सबसे घिनौना अपराध माना जाता है, लेकिन केवल भारत में ही हर दिन हजारों महिलाएं रेप की शिकार होती हैं।
रेप को लेकर भारत सरकार और राज्य सरकारों ने बहुत से कानूनी प्रावधान किये लेकिन उनका रेप के आंकड़ों पर कोई खास प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है। रेप भारत में होने वाले अपराधों की श्रेणी में चौथे नंबर पर है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2013 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में पूरे देश में 24,923 रेप के केस सामने आये जिसमें से 98 फीसदी केसों में किसी जानने वाले शख्स ने ही रेप किया था।
NCRB के 2015 के आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा रेप के मामले सामने आये थे। जबकि शहरों में सबसे ज्यादा रेप जोधपुर में हुए थे। 2015 में पूरे देश में 34651 रेप के मामले सामने आये थे। जिसमें मध्यप्रदेश और दिल्ली में सबसे ज्यादा घटनाएं हुई थीं।
जिसमें कि 33098 केसों में रेप पीड़ित के परिचितों ने ही रेप किया था। रेप पीड़ित लोगों की उम्र 6 साल की कम बच्ची से लेकर 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं तक थीं। केवल मध्यप्रदेश में ही 4391 रेप के मामले दर्ज किये गये। जबकि 2199 रेप केस केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज किये गए।
केवल 2017 में रेप के 11 वीभत्स मामले सामने आये जिन्होंने महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार के प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिये थे। 16 जून 2017 में एक 14 साल की बच्ची के साथ 6 नाबालिकों ने ट्रेन में रेप किया था और उसे ट्रेन से बाहर फेंक दिया था। बिहार की लड़की ने दावा किया था कि रेप
करने वाले लोगों में से एक उसका जूनियर था।
गुरुग्राम में एक 19 साल की मां के साथ रेप का मामला सामने आया था, उसकी आठ साल की बच्ची उसके साथ थी। जिसे रोड पर फेंक दिया गया था और उसकी मौत हो गयी थी। जेवर-बुलंदशहर रोड यमुना एक्सप्रेस पे पर चार महिलाओं के साथ गैंगरेप किया गया था यह घटना भी वीभत्स थी। इस तरह के कई मामले लगातार सामने आते रहे हैं जोकि सरकार की विफलताओं की कहानी कहते हैं।