दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के लिए राजनेता खुफिया विभाग की विफलता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं सूत्रों के अनुसार, जनवरी के पहले हफ्ते में विशेष खुफिया निदेशक ब्यूरो की अध्यक्षता में हुई उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक में लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के इरादों की जानकारी दी गई थी और सभी हितधारकों के साथ इसका जवाब देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की गई थी।
इस बैठक में दिल्ली पुलिस के आठ, आईबी के 12, रॉ के वरिष्ठ अधिकारी, एसपीजी और हरियाणा पुलिस के शीर्ष अधिकारी शामिल थे। 2007 में गठित अलगाववादी संगठन एसएफजे, एक यूएस-आधारित समूह है जो सिखों के लिए एक अलग देश की मांग करता है। संगठन की मांग है कि पंजाब में खालिस्तान बनाया जाए। एसएफजे ने कुछ दिन पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने को लेकर इनाम राशि को यूएस डॉलर 2,50,000 तक बढ़ाने की घोषणा की थी।
वहीं एक फरवरी को संसद भवन में झंडा फहराने पर यूएस डॉलर 3,50,000 तक देने का एलान किया था। हालांकि, दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों संगठनों ने एक फरवरी को संसद तक अपने प्रस्तावित मार्च को स्थगित कर दिया है। वहीं सूत्रों ने दावा किया है कि बैठक में, 20 जनवरी से 27 जनवरी तक लाल किले को बंद करने पर भी चर्चा हुई थी और दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा गया था।
यह भी पढ़ें- दिल्ली हिंसा : घायल पुलिसकर्मियों से मिले गृहमंत्री अमित शाह, जानें अबतक क्या-क्या हुआ
एक आधिकारिक संचार में कहा गया था, 'लाल किले की प्रतिष्ठित स्थिति के कारण, यहां पर खालिस्तानी झंडा फहराने की एसएफजे की पूर्व योजना के बारे में सावधानी बरतना समझदारी होगी।' कट्टरपंथी सिखों और एसएफजे के 'किसी भी दुस्साहस' को विफल करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को दिल्ली में ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व की इमारतों को सुरक्षित करने के लिए कहा गया था। बैठक में एसएफजे और कट्टरपंथी सिख समूहों की योजना और रणनीति को लेकर लंबी चर्चा हुई थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'बैठक में अधिकारियों ने यह भी कहा था कि कट्टरपंथी सिख हर साल गणतंत्र दिवस को 'काला दिवस' के रूप में मनाते हैं और इस साल इन संगठनों के कई नेता दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन स्थल पर मौजूद हैं। एसएफजे इसी का फायदा उठाते हुए पैसों का लालच दे रहा है। दिल्ली की सीमा पर बैठे आंदोलनकारी किसानों को कट्टरपंथी सिखों द्वारा वित्तीय सहायता दी जा रही है।'
दिलचस्प बात यह है कि 26 जनवरी को दोपहर 12 बजे के आसपास एक और इनपुट साझा किया गया था। जिसमें कहा गया था कि ट्रैक्टरों के साथ प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रधानमंत्री आवास, गृह मंत्री आवास, राजपथ, इंडिया गेट और लाल किले की ओर बढ़ने की संभावना है। यह संदेश उन सभी अधिकारियों को भेजा गया था, जो दिल्ली में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए मौके पर मौजूद थे।