राजस्थान के पहलू खान हत्या मामले की जांच में राजस्थान पुलिस ने हर कदम पर लापरवाही बरती। कई मानवाधिकार संगठनों के स्वतंत्र जांच दल की ओर से गुरुवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया कि राजस्थान पुलिस ने आरोपियों को मदद पहुंचाकर नाइंसाफी की।
गत अप्रैल में पशु खरीदकर घर लौट रहे पहलू खान की तथाकथित गोरक्षकों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद स्थानीय लोगों के साथ नागरिक व मानवाधिकारों संगठनों में काफी रोष दिखा था। जगह-जगह प्रदर्शन भी हुए थे। आरोप लगा था कि गोरक्षा के नाम पर समाज में डर फैलाया जा रहा है। इस मसले से जुड़ी रिपोर्ट को देश-विदेश के मानवाधिकार संगठनों ने तैयार किया है।
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इसमें राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए गए हैं। रिपोर्ट में मांग की गई है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायालय को इस मसले में दखल देना चाहिए। पीड़ित के परिजनों को इंसाफ नहीं मिला, तो देश की न्यायिक व्यवस्था व लोकतंत्र पर से आम लोगों का भरोसा उठ जाएगा।
रिपोर्ट में क्या है आरोप
रिपोर्ट बताती है कि पहलू खान पर एक अप्रैल की रात 7 से10 बजे के बीच हमला किया गया। लेकिन रिपोर्ट अगले दिन सुबह 3.54 बजे पर दर्ज की गई। आरोप लगाया है कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में देरी के साथ षड्यंत्र, हत्या की कोशिश, साक्ष्यों को नष्ट करने व डकैती जैसी मामलों की धाराए नहीं लगाईं। यही नहीं, रिपोर्ट बताती है कि पहलू खान ने 11.50 बजे बयान दिया था। इसमें उसने हमले की बात स्वीकार की थी, लेकिन पुलिस ने अस्पताल से 2.9 किमी दूर बहरोड़ पुलिस स्टेशन तक पहुंचने में चार घंटे जाया किए।
पहलू खान ने दावा किया था कि उसके साथ मारपीट के दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे, लेकिन एफआईआर में उनका नाम दर्ज नहीं किया गया। आरोप है कि सारे आरोपी इलाके के कथित भगवा ब्रिगेड से जुड़े हुए थे, लेकिन पुलिस ने 5000 इनाम घोषित करने के अलावा जमीनी स्तर पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
वहीं, छह आरोपियों के पकड़ में आने के बाद रिहाई में उनकी मदद की। प्रेस क्लब में रिपोर्ट को जारी करते वक्त पहलू खान के परिवार के सदस्यों के साथ पूर्व एडीशनल सोलिसिटिर जनरल ऑफ इंडिया इंदिरा जयसिंग, प्रशांत भूषण, कॉलिन गॉंसाल्वेस, तीस्ता सीतलवाड़, संदीप पांडेय समेत जेएनयू के वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े कन्हैया लाल, उमर खालिद समेत कई लोग मौजूद थे।