एक दशक पहले देश में सबसे ज्यादा नौकरी देने वाला आईटी सेक्टर आज आपने ही कर्मचारियों के लिए डिप्रेशन का कारण बनता जा रहा है। इस सेक्टर में बढ़ रही जॉब इनसिक्योरिटी के कारण आईटी इंजीनियर आत्महत्या कर रहे हैं। पुणे में काम करने वाले एक आईटी इंजीनियर का सुसाइड नोट तो ऐसा ही कहता है।
'आईटी सेक्टर में कोई जॉब सिक्योरिटी नहीं, मैं अपने परिवार को लेकर काफी परेशान हूं' , ये लाइन पुणे के रहने वाले एक आईटी इंजीनियर की हैं। जिसने बीते बुधवार को आत्महत्या कर ली।
60 साल के एक बुजुर्ग ने बताया कि उनकी बेटी अचानक से शांत रहने लगी। जब वह उसे काउंसलिंग के लिए ले गए तब उन्हें पता चला कि उसकी नौकरी चली गई, जिसे लेकर वह सदमे में थी। वह हर सुबह तैयार होकर ऑफिस के लिए निकती थी, जबकि उसकी नौकरी जा चुकी थी।
इस साल आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियां विप्रो, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा से लेकर छोटी कंपनियों तक में छटनी हुई है। जिस वजह से हजारों युवा बेरोजगार हो गए। ज्यादातर युवा ऑनलाइन काउंसलिंग के लिए गए। ऑनलाइन काउंसलर योरदोस्त ने पिछले महीने फायर्ड टू फायर्ड अप सिजन चलाया था, जिसमें कंपनी लोगों का तनाव कम करने की कोशिश करते है।
योरदोस्त ने बताया कि 29 जून से 1 जुलाई के बीच हमारे टोलफ्री नंबर पर हमें 260 लोगों ने कॉल किया। जबकि इन तीन दिनों में 800 से ज्यादा लोगों ने चैटिंग के जरिए अपनी बात बताई।
योरदोस्त को की गई कॉल में 43 फीसदी लोग आईटी सेक्टर के है। सबसे ज्यादा 15 फीसदी कॉल कर्नाटक से आई, महाराष्ट्र से 12 फीसदी और दिल्ली से 11 फीसदी युवाओं ने कॉल किया। इसके साथ ही नॉर्थइस्ट से भी कॉल आई, जिसमें ओडिशा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।
योरदोस्त की को-फाउंडर और सीईओ रिचा सिंह ने बताया कि सेक्टर में छटनी कलंक है। जो लोग इस छटनी ने बच गए हैं उन्हें भी चिंता है कि अगली बार उनके साथ क्या होगा।