भारत के 4,041 जनगणना शहरों में से केवल 12 प्रतिशत में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन हैं, जिनमें से केवल 200 सभी छह प्रमुख प्रदूषकों की निगरानी करते हैं, जिससे देश भर में प्रदूषण की सीमा का आकलन करने और ध्यान देने की क्षमता गंभीर रूप से सीमित हो जाती है। एक नए विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है।
विश्लेषण करने वाले पर्यावरण थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने कहा कि देश की लगभग 47 प्रतिशत आबादी वायु गुणवत्ता निगरानी ग्रिड के अधिकतम दायरे से बाहर है।अध्ययन से पता चला कि 62 प्रतिशत आबादी वास्तविक समय निगरानी नेटवर्क के कवरेज दायरे से बाहर है। व्यापक निगरानी की यह कमी चिंताजनक है क्योंकि राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों का अनुपालन और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के लक्ष्य सटीक और मजबूत निगरानी प्रणालियों पर निर्भर हैं।
एनसीएपी का लक्ष्य 2017 को आधार वर्ष मानकर 2024 तक पीएम-2.5 और पीएम-10 सांद्रता में 20 से 30 प्रतिशत की कमी लाना है। सीएसई में अनुसंधान और वकालत की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने निगरानी स्टेशनों के अधिक न्यायसंगत वितरण और हाइब्रिड निगरानी विधियों को अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जनसंख्या की अधिकतम और लागत प्रभावी कवरेज सुनिश्चित करने के लिए उपग्रह-आधारित निगरानी के साथ एक मानकीकृत और प्रमाणित वायु सेंसर नेटवर्क को एकीकृत करने का सुझाव दिया।
निगरानी नेटवर्क का विस्तार करके नीति निर्माता वायु प्रदूषण के खिलाफ साक्ष्य-आधारित कार्यों का समर्थन करने के लिए आवश्यक आंकड़े एकत्र कर सकते हैं। रॉयचौधरी ने कहा कि वर्तमान निगरानी नेटवर्क को डाटा गुणवत्ता और पूर्णता से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इससे वायु गुणवत्ता रुझानों के सटीक आकलन और स्वच्छ वायु लक्ष्यों के अनुपालन में बाधा आती है।
अध्ययन से कुछ प्रमुख शहरों में निगरानी स्टेशनों की सघनता का पता चला, जिससे विशाल क्षेत्र पर्याप्त निगरानी के बिना रह गए। सीएसई की शहरी प्रयोगशाला के एक वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक अविकल सोमवंशी ने एक अधिक व्यापक निगरानी नेटवर्क स्थापित करके इस असमानता को सुधारने की आवश्यकता पर बल दिया, जो व्यापक आबादी और आवासों को कवर करता है। उन्होंने कहा कि ऐसा नेटवर्क प्रभावी स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करेगा, जनता को दैनिक जोखिमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देगा और आपातकालीन प्रतिक्रियाओं और दीर्घकालिक रणनीतियों के डिजाइन को सक्षम करेगा।
सीएसई विश्लेषण ने राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (एनएएमपी) के तहत मैन्युअल निगरानी और सतत परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (सीएएक्यूएमएस) के तहत वास्तविक समय की निगरानी दोनों पर विचार किया। मानव स्वास्थ्य पर इसके महत्वपूर्ण प्रभाव को देखते हुए इसने मुख्य रूप से पीएम-2.5 डाटा की पर्याप्तता और पूर्णता पर ध्यान केंद्रित किया। अध्ययन ने 31 दिसंबर, 2022 तक 883 मैनुअल मॉनिटरिंग स्टेशनों और 409 वास्तविक समय मॉनिटरिंग स्टेशनों के डाटा की जांच की।
सीएसई की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 के बाद से मैनुअल मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या दोगुनी हो गई है। यह 28 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों के 379 शहरों और कस्बों में 883 स्टेशनों तक पहुंच गई है।