अध्ययन के अनुसार, हर साल दुनियाभर में 7. 46 लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इनमें 5.19 लाख पुरुष और 2.27 लाख महिलाएं हैं। यानी हर 42 सेकंड में दुनिया में कहीं न कहीं एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है।
पिछले तीन दशकों के दौरान भारत में आत्महत्या की दर में 31.5 फीसदी की गिरावट आई है। यह मानसिक स्वास्थ्य में सुधार को लेकर बनाई जा रही रणनीतियों में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। वहीं वैश्विक स्तर पर इस दौरान आत्महत्या में 39.5 फीसदी की गिरावट आई। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय जर्नल द लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकशित हुई है। अध्ययन ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरी एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी (जीबीडी) 2021 के निष्कर्षों पर आधारित है।
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रिपोर्ट के अनुसार 1990 में प्रति लाख जनसंख्या पर आत्महत्या करने वालों की संख्या 19 थी, जो 2021 में घटकर 13 हो गई। यह करीब 32 फीसदी की कमी को दर्शाता है। आत्महत्या की दर में गिरावट पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक रही। 1990 से 2021 के बीच पुरुषों में आत्महत्या दर में लगभग 25 फीसदी की कमी आई, जबकि महिलाओं में यह 38.7 फीसदी दर्ज की गई। 1990 में प्रति लाख 21 पुरुष आत्महत्या कर रहे थे जो 2021 में घटकर 15.7 रह गए। जबकि 1990 में प्रति लाख 16.8 महिलाओं ने आत्महत्या की थी जो 2021 में घटकर 10.3 हो गई। हालांकि, 2019 से 2021 के बीच महिलाओं में आत्महत्या दर में 1.31 फीसदी की वृद्धि भी देखी गई।
शिक्षित महिलाओं में आत्महत्या दर अधिक
रिपोर्ट के अनुसार 2020 में भारत में शिक्षित महिलाओं में आत्महत्या की दर सबसे अधिक थी जिसका मुख्य कारण पारिवारिक समस्याएं रहीं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की एक्सीडेंटल डेथ्स और सुसाइड्स इन इंडिया 2022 की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की थी, जबकि 2022 में यह संख्या बढ़कर 1,70,924 हो गई।
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वैश्विक स्तर पर हर 42 सेकंड में एक आत्महत्या
अध्ययन के अनुसार, हर साल दुनियाभर में 7. 46 लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इनमें 5.19 लाख पुरुष और 2.27 लाख महिलाएं हैं। यानी हर 42 सेकंड में दुनिया में कहीं न कहीं एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है।