बजट सत्र के पहले चरण की विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा में पांच या इससे अधिक सदस्यों वाले दस मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 190 सदस्यों को सदन में अपनी बात रखने के 81 प्रतिशत अवसर मिले। इन दलों के सदस्यों की सदन में हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है।
सदस्य संख्या के लिहाज से सदन में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय सदस्यों को अपनी बात कहने के 19 प्रतिशत अवसर मुहैया कराए गए। विश्लेषण में यह बात उजागर करने की कोशिश की गई है कि उच्च सदन में विभिन्न दलों की हिस्सेदारी के मुताबिक उनके सदस्यों को अपनी बात रखने के समान अवसर मिले।
इसके अनुसार आठ गैर राजग दलों के सदस्यों को सदन में हिस्सेदारी के अनुपात के लिहाज से अपनी बात कहने के अधिक अवसर मिले जबकि सत्तारूढ़ भाजपा के सदस्यों को सदन में अपनी हिस्सेदारी से एक प्रतिशत कम अवसर मिले। इसी प्रकार राजग के घटक दल जदयू के सदस्यों की सदन में हिस्सेदारी 2.51 प्रतिशत है जबकि जदयू के सदस्यों को सदन में अपनी बात कहने के 0.55 प्रतिशत अवसर मिले।
विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार गैर राजग दलों में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, अन्नाद्रमुक के सदस्यों को अपनी बात कहने के आनुपातिक तौर पर अधिक अवसर मिले, जबकि बीजद, द्रमुक, टीआरएस और माकपा को सदन में सदस्यों की हिस्सेदारी के अनुरूप अवसर मिले। सिर्फ सपा के सदस्यों को अपनी बात कहने के कम अवसर मिले।
राज्यसभा में बजट सत्र के पहल चरण की कार्यवाही के दौरान 107 सदस्यों ने प्रश्नकाल में और सौ सदस्यों ने राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लिया। जबकि 76 सदस्यों ने शून्यकाल में, 33 सदस्यों ने विशेष उल्लेख के विषय प्रस्तुत करने में और 24 सदस्यों ने निजी विधेयक पेश किए। इस दौरान सदन में 118 सदस्यों के 1120 अतारांकित प्रश्नों के लिखित उत्तर सदन पटल पर प्रस्तुत किए गए।
विश्लेषण में यह बात भी सामने आयी है कि सदन में विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने में क्षेत्रीय दलों के सदस्यों का प्रदर्शन बेहतर रहा। महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने वाले 30 अग्रणी सदस्यों में क्षेत्रीय दलों के 18 सदस्य (60 प्रतिशत) शामिल हैं, जबकि आठ भाजपा और चार कांग्रेस के सदस्यों ने इस मामले में 40 प्रतिशत भागीदारी दर्ज कराई।