भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से इस साल रेपो दर में चार बार में 1.25 फीसदी कटौती कर अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की नीति को सरकार भी समर्थन देने की योजना बना रही है। फरवरी में पेश होने वाले बजट में राजकोषीय सहायता के जरिये मांग को समर्थन देने पर इस बार का बजट केंद्रित हो सकता है।
अर्न्स्ट एंड यंग (ईवाई) की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में आयकर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के कारण राजस्व में कुछ कमी आने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, गैर-कर राजस्व के अंतर्गत कुछ अप्रत्याशित अतिरिक्त प्राप्तियों और राजस्व खर्च के बजटीय आकार में कुछ कमी से सरकार राजकोषीय घाटे और पूंजीगत खर्च के बजटीय लक्ष्यों का पालन करने में सक्षम होगी। इसके अलावा, तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं जन स्वास्थ्य उपकर से संबंधित दो राजस्व बढ़ाने वाले उपायों की घोषणा भी हाल ही में की गई है।
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा, आगे चलकर भारत को विकास को गति देने के लिए अपनी मजबूत घरेलू मांग पर निर्भर रहना पड़ सकता है। आरबीआई की विकासोन्मुखी नीति के साथ 2026-27 के केंद्रीय बजट के माध्यम से विकास को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा सकती है। 2026-27 का बजट 1 फरवरी को संसद में पेश किए जाने की संभावना है। लगातार वैश्विक विपरीत स्थितियों को देखते हुए ईवाई का अनुमान है कि देश की वास्तविक अर्थव्यवस्था वृद्धि में शुद्ध निर्यात का योगदान नकारात्मक बना रहेगा और संभवतः इसकी मात्रा में और ज्यादा वृद्धि भी हो सकती है।
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6.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकती है जीडीपी
ईवाई को अनुमान है कि देश की अर्थव्यवस्था मध्यम अवधि में 6.5 फीसदी की औसत वृद्धि दर के साथ मजबूत विकास गति बनाए रखेगी, जिसे घरेलू निजी निवेश में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति शृंखला संबंधी समस्याओं के कम होने पर और अधिक समर्थन मिलेगा। जून और सितंबर तिमाही में जीडीपी क्रमशः 7.8 फीसदी और 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी। आरबीआई को चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 7.3 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है।