ताजमहल का पीला पड़ चुका गुंबद एक साल तक नजर नहीं आएगा। मुख्य गुंबद को चमकाने के लिए मडपैक थेरेपी के दौरान यह चारों ओर से स्केफोल्डिंग (पाड़) से ढक जाएगा। दुनिया के सातवें अजूबे को तामीर होने के बाद पहली बार मुख्य गुंबद पर मडपैक लगाया जाएगा। इस पर लगे ब्रास के 9.29 मीटर ऊंचे कलश की भी पहली बार एएसआई साइंस ब्रांच केमिकल क्लीनिंग करेगी।
दीदार ए ताज के लिए आने वाले सैलानियों को एक साल तक सेल्फी लेने और फोटोग्राफी कराने में ताज का बैकग्राउंड खूबसूरत नजर नहीं आ पाएगा। गुंबद पर इससे पहले 1940-41 में विश्व युद्ध के दौरान संरक्षण और सुरक्षा के लिए स्केफोल्डिंग लगाई गई थी, लेकिन मडपैक के लिए यह पहला मौका होगा। 75 साल बाद गुंबद वैसा ही नजर आएगा। गुंबद के साथ ही ब्रास के कलश को भी केमिकल ट्रीटमेंट कर साफ किया जाएगा। धूल, बारिश और रस्ट के कारण यह बदरंग हो चुका है। एएसआई ने स्पष्ट कर दिया है कि विश्व धरोहर ताज का रखरखाव पहली प्राथमिकता है, न कि पर्यटकों की सेल्फी। पीलेपन और ब्लैक कार्बन के दाग हटाने को मडपैक जरूरी है।