बाहरी परत हटाने और पॉलिश करने से मोटे अनाज (मिलेट) की पौष्टिकता घट जाती है। बाहरी परत हटने से मोटे अनाजों के दाने जल्दी पक जाते हैं और लंबे समय तक ताजा बने रहते हैं, लेकिन पोषण खो देते हैं। यह जानकारी एक अध्ययन में सामने आई है।
शोधकर्ताओं ने जिन पांच छोटे बीजों वाले भारतीय मोटे अनाजों का अध्ययन किया है उनमें कंगनी (फॉक्सटेल मिलेट), सावा या कुटकी (लिटिल मिलेट), कोदो, सांवा (बार्नयार्ड मिलेट) और चेना या पुनर्वा (प्रोसो मिलेट) शामिल हैं। पॉलिश करने से मोटे अनाजों से फाइबर, वसा, फाइटेट्स और खनिज जैसे पोषक तत्व निकल जाते हैं। पॉलिश किए गए मोटे अनाजों में भूसी युक्त दानों की तुलना में कम पोषक तत्व और फाइबर होता है। चेन्नई के मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन और हैदराबाद के आईसीएआर-भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। इसके नतीजे स्प्रिंगर लिंक जर्नल डिस्कवर फूड में प्रकाशित हुए हैं।
प्रोटीन की मात्रा भी हुई कम
अनाज की मोटी परत हटाकर पॉलिश करने की वजह से सांवा और कुटकी को छोड़कर अन्य सभी तरह के मोटे अनाजों में प्रोटीन का स्तर भी घट गया। भूसी युक्त अनाज को पकाने में समय तो अधिक लगा लेकिन उनके पोषक तत्व बरकरार रहे। इसी तरह पॉलिश किए हुए बिना चोकर वाले मिलेट ने पकने के दौरान अधिक ठोस पदार्थ खो दिए और ज्यादा पानी भी सोख लिया। इससे पता चला कि बीज का बाहरी आवरण हटाने से वह संरचनात्मक रूप से कमजोर हो गए थे।
- शोध के निष्कर्ष में कहा गया है कि पॉलिश किए हुए मोटे अनाजों में फाइबर और पोषक तत्व कम होते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें महंगा बेचा जाता है। इनकी चमक देखकर उपभोक्ता भ्रमित हो जाते हैं।
बढ़ जाता है कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च का स्तर
पॉलिश करने से अनाजों में कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च का स्तर बढ़ जाता है। इसकी वजह से आहार में शर्करा का स्तर (ग्लाइसेमिक लोड) बढ़ सकता है। अनाज के इन दानों पर एक कठोर बाहरी परत होती है जिसे दानों को साफ करते समय निकाल दिया जाता है। इसके बाद उसमें से चोकर को अलग कर पॉलिश कर दिया जाता है, जिससे अनाज चमकदार और सुन्दर दिखने लगता है।
- पौधों के बीज फास्फोरस नामक खनिज को प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले यौगिक में संग्रहित करते हैं जिसे फाइटिक एसिड कहा जाता है। यह पाचन तंत्र में कैल्शियम और आयरन जैसे अन्य खनिजों से जुड़ जाता है और फाइटेट्स के रूप में जाना जाने वाला पदार्थ बनाता है।
पोषक तत्वों से भरपूर फिर भी गेहूं, चावल ज्यादा खाते हैं लोग
मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, हालांकि इसके बावजूद इनका गेहूं, चावल जैसे दूसरे अनाजों की तुलना में कम ही उपयोग किया जाता है। इनमें विटामिन बी, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। ये अनाज दुनिया के कई हिस्सों में खासकर एशिया और अफ्रीका में लोकप्रिय हैं। भारत में भी मोटे अनाजों का अच्छा खासा उत्पादन होता है। राजस्थान में श्री अन्न का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। सोरगम, बाजरा, ज्वार, रागी, फोनियो, कोदो, कुटकी जैसे मोटे अनाज जिन्हें 'कदन्न' भी कहते हैं, अपने अनेकों गुणों के बावजूद वर्षों से उपेक्षित रहे हैं।