कोरोना की खतरनाक लहर को देखते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जेल में दो साल पूरे कर चुके विदेशी बंदियों की रिहाई की शर्तों में ढील दी है। 15 अप्रैल को दिए अपने आदेश में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुसरण करते हुए ऐसे बंदियों को 5000 के निजी मुचलके और एक जमानतदार के आधार पर रिहा करने को कहा है।
चीफ जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस मानस रंजन पाठक ने फैसले को संशोधित करते हुए असाधारण परिस्थिति में दो जमानतियों की जगह एक जमानती पर ही रिहाई का आधार बना दिया है। हाईकोर्ट ने समसुल हक की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। समसुल हक को विदेशी मामलों के ट्राइब्यूनल ने विदेशी करार दिया था।
पीठ ने 10 मई को पारित फैसले में हक को 13 मई को दो वर्ष की सजा पूरी करने पर रिहाई के आदेश दिए। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल, 2020 को एक फैसले में छह शिविरों में हिरासत में रखे गए कैदियों की रिहाई की शर्तों में ढील दी थी। जिसमें 3 वर्ष की सजा को घटाकर दो साल और एक लाख के मुचलके की राशि घटाकर 5000 रुपये कर दी थी।