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भारत में 47 हजार बच्चे लापता: सुप्रीम कोर्ट का देशभर के थानों को निर्देश- गुमशुदगी पर बिना देरी दर्ज हो एफआईआर

Fri, 22 May 2026 07:14 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में गुमशुदा बच्चों की बढ़ती संख्या पर निराशा जताई और सभी थानों को निर्देश दिया कि वे प्रारंभिक जांच या अभिभावकों की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल प्राथमिकी दर्ज करें। पढ़िए रिपोर्ट-
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि भारत में आज की तारीख में 47 हजार बच्चे गुमशुदा हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने देशभर के पुलिस अधिकारियों को गुमशुदगी के मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज का निर्देश दिया। शीर्ष कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि मानव तस्करी विरोधी इकाइयों को चार हफ्तों के भीतर पूरी तरह सक्रिय किया जाए।
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न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने गुमशुदगी के बढ़ते मामलों पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि लापता बच्चे अक्सर संगठित अंतरराज्यीय तस्करी गिरोहों के शिकार होते हैं। 

गृह मंत्रालय को क्या निर्देश दिया?
शीर्ष कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) को निर्देश दिया कि वह देश के प्रत्येक थाने को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ने वाला नेटवर्क तैयार करे, जिसमें लापता बच्चों और महिलाओं समेत मानव तस्करी के लिए समर्पित एक विशेष पोर्टल होगा। 
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थानों को कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
  • शीर्ष कोर्ट ने कहा कि संबंधित थानों को निर्देश दिया जाता है कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही प्रारंभिक जांच या लापता व्यक्ति के अभिभावकों की प्रतीक्षा किए बिना तुरंत प्राथमिकी दर्ज करें।
  • कोर्ट ने कहा कि उस प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अपहरण/तस्करी संबंधी प्रावधानों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।
  • इसने कहा कि जब भी कोई बच्चा लापता होता है, तो अधिकारियों को शुरू से ही अपहरण या अगवा होने की आशंका के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
  • कोर्ट ने कहा कि अपहरण से संबंधित दंड प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों को दर्ज करने से जांच में गंभीरता सुनिश्चित होगी और देरी से बचा जा सकेगा। 
  • यह भी निर्देश दिया गया कि जिन बच्चों का पता लगाया जाता है, उन्हें 24 घंटों के भीतर उनके परिवारों को सौंप दिया जाना चाहिए, जब तक इस बात के संकेत न हों कि परिवार खुद तस्करी या शोषण में शामिल था।  

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पीठ ने कहा, किसी गुमशुदा को बरामद करने या सुरक्षित छुड़ाए जाने के तुरंत बाद उसे आधार सत्यापन या आधार कार्ड बनवाने के लिए ले जाया जाना चाहिए। यह निर्देश इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है कि आधार कार्ड बनवाने के लिए उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) और अन्य बायोमेट्रिक्स लिए जाते हैं। ये निर्देश जी गणेश की ओर से मद्रास हाईकोर्ट में दायर एक याचिका पर जारी किए गए हैं। उनकी बेटी 19 सितंबर, 2011 को चेन्नई से लापता हो गई थी।
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