इस्लामिक विद्वान जाकिर नाईक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) पर प्रतिबंध के मुद्दे की सुनवाई की रिकॉर्डिंग की जाएगी। आईआरएफ के खिलाफ लगे आरोपों तथा गोपनीय तथ्यों की एक न्यायाधिकरण द्वारा जांच को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश संगीता धींगरा सहगल ने वृहस्पतिवार को यह निर्णय लिया। वह अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रीवेंशन एक्ट (यूएपीए) के तहत गठित न्यायाधिकरण की अध्यक्षता कर रही हैं। न्यायाधिकरण ने यूएपीए, आईआरएफ पर युवाओं को भड़काने के आरोप तथा मामले की गोपनीयता के मद्देनजर रिकॉर्डिंग की केंद्र की अपील को स्वीकृत कर लिया। इस मामले में सबूतों की रिकॉर्डिंग के लिए आगे की सुनवाई 17 मार्च, 18 मार्च और 20 मार्च को होने की उम्मीद है।
आईआरएफ ने केंद्री की अपील का विरोध किया था। आईआरएफ ने गृह मंत्रालय द्वारा पिछले साल 17 नवंबर को प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना के खिलाफ अपील की थी। हालांकि न्यायाधिकरण ने छह फरवरी से पहले इस पर सुनवाई से इंकार कर दिया था जिसके बाद आईआरएफ ने प्रतिबंध को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।