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झोलाछाप डॉक्टरों पर रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाई, 300 से ज्यादा के खिलाफ दर्ज की शिकायत

Thu, 21 Dec 2017 06:51 AM IST
परीक्षित निर्भय / नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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देश की राजधानी दिल्ली में झोलाछाप डॉक्टरों पर अबकी बार रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाई हुई है। पिछले सात वर्षों में पहली बार 300 से ज्यादा डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, जिसमें से 65 से ज्यादा डॉक्टरों को झोलाछाप घोषित करते हुए उनके क्लीनिक पर ताला जड़ दिया गया है, जबकि दिल्ली मेडिकल काउंसिल की ओर से 60 से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टरों पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
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राजधानी में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) ने पिछले महीने ही बड़े स्तर पर एक अभियान चलाया था, जिसमें दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में डीएमसी के अधिकारियों ने न सिर्फ अनैतिक चिकित्सा को लेकर जागरूकता लाने का काम किया, लोगों की शिकायतों पर संज्ञान लेना भी शुरू किया। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2010 से लेकर अब तक सबसे ज्यादा शिकायतें इसी साल में सामने आई हैं।

पढ़ें- इन क्लिनिक में न जाएं, फर्जी हैं यहां के डॉक्टर

डीएमसी के रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि साल भर में उनके पास 370 शिकायतें आई थीं। इनमें 69 झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करते हुए तत्काल उनके क्लीनिक को बंद कर दिया गया, जबकि 90 से ज्यादा डॉक्टरों से अभी जवाब तलब किया गया है। इनके खिलाफ आरोप साबित होने पर कार्रवाई की जाएगी। 
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केवल 20 हजार लाइसेंसी डॉक्टर

Doctor
दिल्ली में तकरीबन 70 हजार डॉक्टर गली-कूचों में मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जबकि लाइसेंस वाले महज 20 हजार ही डॉक्टर हैं। इनके पास दिल्ली मेडिकल काउंसिल व दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन का बाकायदा रजिस्ट्रेशन भी है, लेकिन झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई लाइसेंस नहीं है। झोलाछाप बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम, बदन दर्द जैसी शुरुआती बीमारियों में गोलियां देकर मरीज को चपत लगा रहे हैं।

झोलाछाप भी दो प्रकार के

दिल्ली में फैले झोलाछाप डॉक्टर दो प्रकार के हैं। इनमें से एक वर्ग फर्जी डिग्री के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहा है, तो दूसरा आयुर्वेद  या यूनानी की डिग्री लेने के बाद मरीज को एलोपैथी दवाएं दे रहे हैं। नियमों की मानें तो दोनों ही वर्ग अपराध की श्रेणी में आते हैं।  

डॉक्टर कोई भी हो, मायने नहीं

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक, दिल्ली में क्रॉस ट्रीटमेंट तेजी से बढ़ रहा है। यह सच है कि दिल्ली के बड़े अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ रहती है, लेकिन हकीकत यह भी है कि छोटी-छोटी बीमारियों में लोग इन अस्पतालों में जाने से कतराते हैं, इसलिए वे पास के क्लीनिक पर जाकर इलाज कराना ही बेहतर मानते हैं। फिर चाहे वह डॉक्टर कोई भी हो, मरीज के लिए इसके कोई मायने नहीं होते।
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बंगाली इलाज अभी भी

doctor arrested
एक तरफ डीएमसी ने झोलाछाप के खिलाफ रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाई की हो, लेकिन दूसरी ओर राजधानी में अभी भी बंगाली इलाज के मामले सामने आ रहे हैं। जानकारों की मानें तो दिल्ली के बाहरी इलाकों में फर्जी बंगाली डॉक्टरों का रैकेट ज्यादा काम कर रहा है। वहीं, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी फर्जी डिग्री बोर्ड पर लगाकर झोलाछाप मरीजों का उपचार कर रहे हैं।

साल दर साल की स्थिति
वर्ष    झोलाछाप डॉक्टर
2010    125 
2011    137 
2012    241 
2013    55 
2014    162 
2015    125 
2016    240 
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