कर्नाटक में किसका खेल बिगाड़ेंगे बागी?: BJP के साथ कांग्रेस और JD(S) में भी नाराजगी, समझें सियासी गणित
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 14 Apr 2023 04:59 PM IST
सार
कहा तो ये भी जाने लगा है कि इस बगावत के चलते कहीं भाजपा का हाल हिमाचल प्रदेश वाला न हो जाए। आइए समझते हैं कि नेताओं की ये बगावत किसका खेल बिगाड़ सकती है? भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस से किसने की बगावत? सियासी गणित क्या है?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
कर्नाटक चुनाव में नेताओं की नाराजगी और दलबदल चरम पर है। टिकट बंटवारे के साथ राजनीतिक दलों में घमासान भी जारी है। जिनका टिकट कटा, उन्होंने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। ऐसे बागी लगभग सभी बड़े दलों में हैं। हालांकि, सत्ताधारी भाजपा के बागियों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कहा तो ये भी जाने लगा है कि इस बगावत के चलते कहीं भाजपा का हाल हिमाचल प्रदेश वाला न हो जाए। आइए समझते हैं कि नेताओं की ये बगावत किसका खेल बिगाड़ सकती है? भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस से किसने की बगावत? सियासी गणित क्या है?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
कर्नाटक चुनाव में नेताओं की नाराजगी और दलबदल चरम पर है। टिकट बंटवारे के साथ राजनीतिक दलों में घमासान भी जारी है। जिनका टिकट कटा, उन्होंने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। ऐसे बागी लगभग सभी बड़े दलों में हैं। हालांकि, सत्ताधारी भाजपा के बागियों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कहा तो ये भी जाने लगा है कि इस बगावत के चलते कहीं भाजपा का हाल हिमाचल प्रदेश वाला न हो जाए। आइए समझते हैं कि नेताओं की ये बगावत किसका खेल बिगाड़ सकती है? भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस से किसने की बगावत? सियासी गणित क्या है?
पहले जानिए भाजपा के बड़े बागियों के बारे में
भाजपा के कई नेताओं ने इस वक्त बागी रुख अख्तियार कर लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता जगदीश शेट्टार को अब तक टिकट नहीं मिल पाया है। उन्होंने एलान कर दिया है कि वह चुनाव लड़ेंगे। बीएस येदियुरप्पा के बाद शेट्टार लिंगायत समुदाय के दूसरे बड़े नेता हैं। ऐसे में शेट्टार की नाराजगी से भाजपा में हलचल काफी अधिक है। कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण संगप्पा ने भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने इस बात का एलान किया है।
मुडिगेरे से तीन बार के विधायक एम पी कुमारस्वामी ने और हावेरी से विधायक नेहरू ओलेकर ने टिकट नहीं मिलने के बाद बृहस्पतिवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। कुमारस्वामी ने भाजपा द्वारा टिकट काटे जाने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वह विधायक के तौर पर भी विधानसभा अध्यक्ष को जल्द ही अपना इस्तीफा सौंप देंगे।
अनुसूचित जाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 65 वर्षीय ओलेकर दो बार के विधायक हैं। पार्टी द्वारा की गई अनदेखी से खफा ओलेकर ने सड़क पर उतर समर्थकों के साथ प्रदर्शन भी किया। ओलेकर की जगह हावेरी (एससी) निर्वाचन क्षेत्र में गविसिद्दप्पा दयामनवर को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। ओलेकर ने दावा किया कि हजारों भाजपा कार्यकर्ता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं।
तुमकुरु शहर से टिकट के दावेदार पूर्व विधायक सोगाडू शिवन्ना ने भी भाजपा से इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि पार्टी ने उनकी जगह जीबी ज्योति गणेश को मैदान में उतारने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि उनके समर्थकों और मतदाताओं ने उनसे चुनाव लड़ने के लिए कहा है और वह 20 अप्रैल से पहले अपना नामांकन दाखिल करेंगे।
मंत्री और दक्षिण कन्नड़ जिले के सुलिया निर्वाचन क्षेत्र से छह बार के विधायक एस अंगारा ने फिर से टिकट ना मिलने पर राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की। उडुपी के विधायक रघुपति भट ने कहा है कि वह पार्टी द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार से बहुत दुखी हैं।
रानेबेन्नूर विधानसभा सीट के लिए दावेदार भाजपा एमएलसी आर शंकर ने बुधवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। होसदुर्ग से विधायक गूलीहट्टी शेखर ने कहा है कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे या पूर्व मंत्री एवं खनन कारोबारी जी जनार्दन रेड्डी के नवगठित कल्याण राज्य प्रगति पक्ष में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने समर्थकों से विचार-विमर्श करने के बाद जल्द फैसला करूंगा।''
भाजपा में टिकट न मिलने से नाराज होने वाले नेताओं की लिस्ट काफी लंबी है। ऐसे में पार्टी को डर है कि कहीं हिमाचल प्रदेश जैसा हाल यहां भी न हो जाए। यही कारण है कि पार्टी के बड़े दिग्गजों ने नाराज नेताओं को मनाने के लिए कमान संभाल ली है।
बगावत पर भाजपा ने क्या कहा?
पार्टी में मचे घमासान पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई का बयान सामने आया। उन्होंने कहा, 'टिकट पाने की उम्मीद रखने कुछ नेताओं और विधायकों ने इस्तीफे की घोषणा की है। कुछ ने इस्तीफा भी दे दिया है। हम कार्यकर्ताओं और नेताओं से बात कर रहे हैं और इस समस्या का हल निकाला जा रहा है। मैं वरिष्ठों (जो असंतुष्ट हैं) से बात कर रहा हूं, हमारा आलाकमान भी उनसे बात करेगा। मुझे विश्वास है कि चीजें हल हो जाएंगी।'
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर पार्टी के चंद सदस्यों के बीच असंतोष है और कुछ बयान भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि वह सभी से व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे। येदियुरप्पा ने कहा, ‘उन्हें भाजपा के साथ सहयोग करना चाहिए। मैं कल से उनसे (असंतुष्ट) बात कर रहा हूं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भ्रम नहीं हो। संभवत: एक या दो मामलों के अलावा चीजें सुलझ जाएंगी और मुझे विश्वास है कि वे सहयोग करेंगे।'
येदियुरप्पा ने भी कहा कि वह कुमारस्वामी से बात करेंगे। उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने उन्हें चीजों से वंचित नहीं किया है। हमने उन्हें सब कुछ दिया है। इस्तीफा देना आसान है। उन्हें हल्की बातें नहीं करनी चाहिए।'
कांग्रेस में भी उठापटक
ऐसा नहीं है कि बगावत केवल भाजपा में है। कांग्रेस और जेडीएस नेता भी बागी रुख अख्तियार कर रहे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि भाजपा से बगावत करके ज्यादातर नेता कांग्रेस और जेडीएस में ही शामिल हो रहे हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस और जेडीएस उन्हें टिकट देती हैं तो उस पार्टी के पुराने नेता नाराज हो जाएंगे। ऐसा दिख भी रहा है। कर्नाटक के पूर्व एमएलसी और कांग्रेस नेता रघु आचार ने बागी रुख अख्तियार करते हुए जनता दल (सेक्यूलर) का दामन थाम लिया है।
वहीं, कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कगोडु थिम्मप्पा की बेटी ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। बुधवार को डॉ. राज नंदिनी भाजपा में शामिल हो गईं। इस दौरान भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी मंच पर उपस्थित थे। भाजपा में शामिल होने के बाद डॉ. राज नंदिनी ने कहा कि कांग्रेस ने बाहर से आए एक व्यक्ति को टिकट दे दिया। उन्होंने मुझे बताया तक नहीं। कांग्रेस ने मुझे टिकट नहीं दिया, इसलिए मैं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई।
जेडीएस को भी लगे कई झटके
भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ जेडीएस को भी कई झटके लग चुके हैं। जेडीएस नेता अब्दुल अजीज ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इन्होंने नरसिम्हाराजा विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांगा था। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और प्रदेश इकाई के सचिव पद से अब्दुल अजीज के इस्तीफे का पत्र प्रदेश इकाई के अध्यक्ष चंगाई मंगलोते इब्राहिम को सौंपा गया है। बताया जाता है कि अब्दुल अजीत अब कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस नेता सिद्धारमैया से मुलाकात भी की।
कर्नाटक के आरसिकेरे निर्वाचन क्षेत्र के जनता दल (एस) विधायक के एम शिवलिंगे गौड़ा ने भी पार्टी छोड़ दी है। गौड़ा के कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है। इसी तरह मांड्या से पूर्व लोकसभा सदस्य एलआर शिवराम गौड़ा भी पिछले दिनों सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए हैं।
तो किसका कितना होगा नुकसान?
इसे समझने के लिए हमने कर्नाटक के राजनीतिक विश्लेषक एस. वीरेंद्र से बात की। उन्होंने कहा, 'आमतौर पर चुनाव के दौरान सभी बड़े दलों में बगावत देखने को मिलती है। बड़ी पार्टियों से टिकट पाने वाले दावेदारों की लिस्ट लंबी होती है। जिन्हें मिलता है, वह खुश हो जाते हैं और जिन्हें नहीं मिलता है, उनमें से कई बागी रुख अख्तियार कर लेते हैं। इस समय भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस में भी यही हो रहा है।'
वीरेंद्र आगे कहते हैं, 'भाजपा में हो रही बगावत इसलिए चर्चा में है, क्योंकि यही पार्टी अभी सत्ता में है। ऐसे में बगावत का सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही उठाना पड़ सकता है। हालांकि, इसकी तुलना सीधे तौर पर हिमाचल प्रदेश के चुनाव से करना ठीक नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि हिमाचल प्रदेश में मतदाता कम हैं। ऐसे में 10 वोट भी वहां काफी मायने रखता है, लेकिन कर्नाटक में ऐसा नहीं है। कर्नाटक में वही बागी नेता असर डाल सकेंगे जिनका थोड़ा जनाधार होगा।'
वीरेंद्र के अनुसार, भाजपा छोड़कर कई नेता कांग्रेस और जेडीएस जा रहे हैं। ये दोनों पार्टियां भाजपा के बागी नेताओं का स्वागत भी कर रहीं हैं। भाजपा के कई बागियों को इन दोनों पार्टियों ने टिकट भी दे दिया है। ऐसे में इन दोनों पार्टी के पुराने नेता भी नाराज हैं।