महाराष्ट्र में शिवसेना और बागियों के बीच जबर्दस्त सियासी संग्राम जारी है। शिवसेना और 2019 में बनी महाविकास अघाड़ी सरकार अपने गठन के बाद के अभूतपूर्व संकट से जूझ रही है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आखिर इतनी बड़ी तादाद में बागी विधायक महाराष्ट्र पुलिस व उनकी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों को गच्चा देकर कैसे सूरत पहुंच गए? उनके गुजरात कूच की भनक राज्य की खुफिया पुलिस को भी कैसे नहीं लगी? इन सवालों के जवाब एक पुलिस अधिकारी ने दिए हैं।
खुफिया तंत्र की कोई विफलता नहीं, दी थी जानकारी
उधर, महाराष्ट्र के गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में कोई खुफिया विफलता नहीं हुई, क्योंकि राज्य के खुफिया विभाग ने पिछले कुछ महीनों से शिवसेना के कुछ विधायकों के विपक्षी दल के नेताओं के संपर्क में होने की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा, कागज पर कुछ भी नहीं था क्योंकि सब कुछ संबंधित लोगों को मौखिक रूप से बता दिया गया था, लेकिन सूचना पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
गृहमंत्री वलसे पाटिल से पवार खफा
कहा जा रहा है कि दो दिन पहले राकांपा प्रमुख शरद पवार ने राज्य के गृह मंत्री दिलीप वलसे-पाटिल, जो कि उनकी पार्टी हैं, के प्रति नाराजगी प्रकट की है। पवार ने पाटिल से शिवसेना विधायकों के भागने के बारे में अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए सवाल किया था। पवार ने पूछा कि राज्य के गृह मंत्रालय और खुफिया विभाग ने एमवीए नेतृत्व को इस बारे में सतर्क क्यों नहीं किया?
48 विधायकों के साथ गुवाहाटी की होटल में हैं शिंदे
एकनाथ शिंदे बुधवार से शिवसेना के कम से कम 38 बागी विधायकों और 10 निर्दलीय विधायकों के साथ गुवाहाटी की एक होटल में डेरा डाले हुए हैं। इससे पूर्व दो दिन ये सूरत की होटल में रहे थे। शिंदे गुवाहाटी से ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पर हमले बोल रहे हैं। इसके साथ ही राज्यपाल व डिप्टी स्पीकर को पत्र लिख रहे हैं। वहीं से वे भावी राजनीतिक समीकरण बैठा रहे हैं।
महाराष्ट्र में मौजूदा सियासी संकट 20 जून को हुए विधान परिषद के चुनाव के चंद घंटों बाद उभरा। इन चुनावों में विपक्षी भाजपा अपनी ताकत से ज्यादा पांच सीटें जीतने में कामयाब हुई। इसके पहले राज्यसभा चुनाव में भी उसने राज्य के शिवसेना, कांग्रेस व राकांपा के महाविकास अघाड़ी गठबंधन को पटखनी दी थी। विधान परिषद के नतीजे आने के बाद से शिंदे से शिवसेना का संपर्क नहीं हो पा रहा था। कुछ घंटे बाद वे बागी विधायकों के साथ सूरत में प्रकट हुए थे।