शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सोमवार को कहा कि तृणमूल कांग्रेस के जिन बागी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑ इंडिया' में विलय कर लिया है, उनका अब मूल पार्टी पर कोई दावा नहीं रहा। बागी गुट के सुदीप बंद्योपाध्याय ने रविवार को कहा कि वे असली टीएमसी के तौर पर मान्यता पाने और अपना चुनाव चिह्न हासिल करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवाद पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के बागी सांसदों ने जब नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया है, तो अब उनका मूल टीएमसी और उसके चुनाव चिन्ह पर कोई अधिकार नहीं रह जाता।
अयोग्यता से बचने के लिए एकमात्र रास्ता था- संजय राउत
शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने सोमवार को कहा कि बागी सांसदों के सामने अयोग्यता से बचने के लिए एनसीपीआई में शामिल होना ही एकमात्र रास्ता था। ऐसे में अब वे खुद को असली टीएमसी बताने या पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा करने की स्थिति में नहीं हैं। दरअसल, बागी गुट के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने रविवार को कहा था कि उनका गुट कानूनी लड़ाई लड़कर खुद को असली टीएमसी के रूप में मान्यता दिलाने और पार्टी का चुनाव चिन्ह हासिल करने की कोशिश करेगा।
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भाजपा पर भी संजय राउत ने साधा निशाना
संजय राउत ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि बागी सांसदों ने ऐसी पार्टी में विलय क्यों किया, जिसके उम्मीदवार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐसी छोटी-छोटी पार्टियां बनाती है और विपक्षी नेताओं को उनमें शामिल होने के लिए मजबूर करती है।
बंगाल में टीएमसी पर नियंत्रण को लेकर दोहरी जंग
पश्चिम बंगाल में टीएमसी पर नियंत्रण को लेकर लड़ाई संसद और विधानसभा दोनों जगह चल रही है। हाल ही में पार्टी के 80 में से 64 विधायकों ने अलग होकर एक नया गुट बना लिया था। इस गुट के नेता रितब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता भी मिल गई है।
मूल टीएमसी कर रही फैसले का विरोध
वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल टीएमसी गुट इस फैसले का विरोध कर रहा है। पार्टी ने इस मामले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जहां इस विवाद पर कानूनी सुनवाई जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और अब सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि टीएमसी पर असली अधिकार किसका होगा।