सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सौम्या मामले में अपने फैसले की आलोचना करने पर पूर्व न्यायाधीश को समन जारी करने पर जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। जस्टिस काटजू का कहना है कि वह अदालत में पेश होने के तैयार है लेकिन वह चाहते हैं कि शीर्ष अदालत संविधान की धारा अनुच्छेद 124(7) पर विचार करे जो उन्हें अदालत के समक्ष पेश होने से रोकती है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘मुझे अदालत के समक्ष पेश होने और इस मामले पर खुली अदालत में बहस करने पर खुशी होगी लेकिन चाहता हूं न्यायाधीश इस बात पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट का पूर्व जज होने के नाते मैं अनुच्छेद 124 (7) के तहत अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकता। ’ नियमों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट सहित किसी भी अदालत में वकालत नहीं कर सकते।
दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस काटजू को नोटिस जारी कर पूछा था कि सौम्या दुष्कर्म और हत्या मामले में अदालत के फैसले में क्या कमी है। अदालत ने उन्हें कहा था कि वे स्वयं आकर उन्हें बताएं कि फैसले में ऐसी क्या खामी है कि अदालत उस पर पुनर्विचार करे। कोर्ट ने उन्हें 11 नवंबर को सुनवाई में भाग लेने का आग्रह किया था।