सीनियर वकील उज्जवल निकम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ये न्यायपालिका के लिए एक काला दिवस है, क्योंकि ये प्रेस कॉन्फ्रेंस एक गलत प्रभाव ला सकती है। इतना ही नहीं आम आदमी हर न्यायिक फैसले पर सवाल खड़ा कर सकता है।
पूर्व रिटायर्ड जज आर एस सोढ़ी ने जजों के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया और कहा कि ये उनकी बचकानी हरकत है। 23 जजों में से सिर्फ 4 इक्ट्ठे हुए जिन्होंने चीफ जस्टिस को कटघरे में खड़ा कर दिया। मैं मानता हूं कि चारों जजों को इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए। लोकतंत्र खतरे में है ये उन्हें कहने की जरूरत नहीं उसके लिए संसद हमारे देश में मौजूद है।