रिजर्व बैंक ने संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति से कहा है कि उसके पास ये जानकारी नहीं है कि नोटबंदी के बाद कितना कालाधन खत्म हुआ या कितनी अघोषित नकदी नोट बदलवाने के दौरान वैध हो गई। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि 15.85 लाख करोड़ रुपये के नोट बैंकिंग सिस्टम में लौट चुके हैं।
हालांकि सत्यापन प्रक्रिया के बाद ही इनकी सही संख्या बताई जा सकती है। रिजर्व बैंक का यह भी कहना है कि उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि निरंतर अंतराल के बाद नोटबंदी किए जाने की कोई योजना है अथवा नहीं।
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आरबीआई नोटबंदी और इसके बाद सिस्टम में लौटे धन के आंकड़े जारी करने में हुई देरी को लेकर विपक्षी पार्टियों के निशाने पर है। वहीं सरकार का कहना है कि 8 नवंबर, 2016 की नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर होने से कालेधन पर लगाम लगाने में मदद मिली और इसके दूसरे फायदे भी हुए।
गत सप्ताह अपनी वार्षिक रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने बताया था कि नोटबंदी के बाद 15.28 लाख करोड़ रुपये की करेंसी बैंकिंग सिस्टम में लौट चुकी है। यही आंकड़ा स्थायी समिति के समक्ष साझा किया गया है।
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समिति के सवालों का जवाब देते हुए आरबीआई ने कहा, प्रमाणिकता और संख्यात्मक सटीकता के लिए सत्यापन अब भी चल रहा है, इसके साथ ही बैंकों द्वारा स्वीकार किए गए 500 और 1000 रुपये के कुछ पुराने नोट अब भी करेंसी चेस्ट में पड़े हैं। केंद्रीय बैंक ने समिति को यह भी बताया कि सत्यापन की प्रक्रिया में समय लगेगा। यह प्रक्रिया पूरी तेजी से चल रही है।
आरबीआई के अधिकारी दो शिफ्टों में काम कर रहे हैं। इस काम अत्याधुनिक मशीनों की मदद ली जा रही है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक बैंकों में आए नोटों का अनुमान ही लगाया जा सकता है।