फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिजर्व बैंक ने छोटी बचत योजनाओं के कर्ज की ब्याज दर घटाई

Sat, 29 Jun 2019 06:35 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

  • चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए कर्ज की औसत आधार दर में कटौती की
  • 9.18 फीसदी तय की है जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए औसत आधार दर
  • 9.21 फीसदी रही थी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आधार दर
विज्ञापन
RBI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी और एमएफआई से कर्ज लेना सस्ता कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को बताया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के लिए इनके कर्ज पर ब्याज की आधार दर में मामूली कटौती की गई है। इससे लघु उद्योगों और खुदरा उपभोक्ताओं को कम ब्याज पर कर्ज मिल सकेेगा।
विज्ञापन


रिजर्व बैंक की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक, 1 जुलाई से गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों (एमएफआई) के लिए कर्ज की आधार दर 9.18 फीसदी रहेगी। ये वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों से इसी आधार दर के हिसाब से कर्ज पर ब्याज वसूल सकेंगे।

वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में यह आधार दर 9.21 फीसदी थी। आरबीआई ने 7 फरवरी, 2014 को दिशानिर्देश जारी कर बताया था कि हर तिमाही के आखिरी कार्यदिवस पर वह एनबीएफसी व एमएफआई की अगली तिमाही के लिए औसत आधार दरें तय करेगा। इसी के तहत उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले ब्याज की सीमा तय की जाएगी।

एनबीएफसी की रेपो रेट है यह आधार दर

रिजर्व बैंक की ओर से तय की जाने वाली यह औसत आधार दर एनबीएफसी और एमएफआई के लिए रेपो रेट की तरह होती है। जिस तरह वाणिज्यिक बैंक रेपो रेट में अपनी अपना परिचालन खर्च जोड़कर एमसीएलआर तय करते हैं। उसी तरह एनबीएफसी भी इस आधार दर में अपने परिचालन खर्चों को जोड़कर ग्राहकों से कर्ज पर ब्याज वसूलती हैं। आरबीआई इस दर का निर्धारण पांच बड़े वाणिज्यिक बैंकों की आधार दर के हिसाब से तय करता है।

रिजर्व बैंक ने जताई थी चिंता

रिजर्व बैंक ने एक दिन पहले जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में भी माना है कि देश की एनबीएफसी की वित्तीय हालत काफी खराब है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि बड़ी एनबीएफसी का डूबना बैंकों के बरबाद होने जैसा है। लिहाजा इस क्षेत्र को ज्यादा मदद और निगरानी की जरूरत है। सबसे बड़ी एनबीएफसी में शुमार दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) कई डिफाल्ट की वजह से डूबने की कगार पर पहुंच गई है।

बढ़ रहा क्षेत्र पर संकट

एनबीएफसी क्षेत्र पर वित्तीय संकट में और इजाफा होता जा रहा है। मार्च 2019 तक आरबीआई के साथ पंजीकृत 9 हजार से ज्यादा एनबीएफसी में से सिर्फ 8 ने बाजार से धन जुटाए थे। उनका सकल एनपीए भी 2018-19 में बढ़कर 6.6 फीसदी हो गया है, जो 2017-18 में 5.8 फीसदी था। हालांकि, इस दौरान वास्तविक एनपीए में मामूली गिरावट आई और यह 2017-18 के 3.8 फीसदी से घटकर 2018-19 में 3.7 फीसदी पहुंच गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें