मंगलवार को चार देशों में रैनसमवेयर का साइबर अटैक हुआ, जिसकी चपेट में भारत का सबसे बड़ा जवाहर लाल नेहरू पोर्ट भी आया। हालांकि बुधवार को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि भारत में इस साइबर हमले का असर लगभग न के बराबर हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस साइबर अटैक से निपटने के उपाय पहले ही कर लिए थे और उस पर बारीकी से नजर रखी जा रही थी।
बता दें कि शिपिंग मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जेएनपीटी (JNPT) भी इस साइबर हमले की जद में आया है। पोर्ट के एक टर्मिनल का संचालन इससे प्रभावित हुआ है। जेएनपीटी में हमले से प्रभावित एपी मोलर-माएस्क गेटवे टर्मिनल इंडिया (जीटीआई) का संचालन करती है।
रूस और यूक्रेन से शुरू हुए इस हमले ने देखते ही देखते यूरोप के कई देशों और अमेरिका के कई सर्वरों को अपनी चपेट में ले लिया। रूस में सबसे बड़ी तेल कंपनी रोसनेफ्ट इसकी चपेट में आई वहीं यूक्रेन में सरकारी मंत्रालयों, बिजली कंपनियों और बैंक के कंप्यूटर सिस्टम बैठ गए।
माएस्क समूह ने भी माना है कि इस साइबर अटैक से उसके कई बड़े ऑपरेशन पर घातक असर पड़ा है। कंपनी ने अपने ट्वीट में बताया कि इस पेट्रया नामक साइबर अटैक ने कंपनी की कई अहम साइट्स और बिजनेस ईकाइयों को नुकसान पहुंचाया है।