फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में पर्याप्त प्रतिनिधित्व चाहता है भारत : रवि शंकर

Sat, 27 Aug 2016 10:16 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली.
विज्ञापन
रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के बाद एक बार फिर से भाजपा ने कांग्रेस को घेरा - फोटो : ANI
विज्ञापन
केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने शनिवार को कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के केंद्र के रूप में खुद को विकसित करना चाहता है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका के केवल कुछ सदस्य ही अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान तंत्र का हिस्सा हैं। यह दुखद स्थिति है। 
विज्ञापन


इस पर चिंता जताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि केवल कुछ विकसित देश ही अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाए कि गैर-पश्चिमी देशों से मध्यस्थों की संख्या कम क्यों है। 

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पर ब्रिक्स देशों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘मुझे अपनी न्यायपालिका पर गर्व है। इसने कुछ अच्छे जज दिए हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है।’
विज्ञापन

 
उन्होंने यह भी सवाल उठाए कि ऐसी धारणा क्यों है कि केवल पश्चिमी न्यायिक प्रक्रिया ही मध्यस्थों को प्रशिक्षित कर सकती हैं और वे ही विश्व विवाद निवारण तंत्र पर कब्जा जमाए हुए हैं। प्रसाद ने कहा कि मैं भारत के कानून मंत्री के तौर पर इसकी तस्वीर रख रहा हूं। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्था प्रक्रिया में तकरीबन 69.8 फीसदी मध्यस्थ पहली दुनिया या विकसित देशों से हैं। कानून मंत्री ने विवाद समाधान प्रणाली में अपीलीय तंत्र की खामियों पर भी जोर दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें