घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने ग्रामीण क्षेत्र में खर्च को प्रोत्साहन और खपत व राजस्व में सुस्ती को देखते हुए बजट में प्रस्तावित आर्थिक विकास के लक्ष्य हासिल होने पर संदेह जाहिर किया है। क्रिसिल ने कहा कि बजट में प्रस्तावित उपायों से अल्पकालिक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद नहीं है। अर्थव्यवस्था में जारी एक दशक की सबसे बड़ी सुस्ती को देखते हुए क्रिसिल ने कहा कि ऐसा खपत और निवेश में कमी की वजह से है।
यदि वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी विकास अनुमान 5.7-6.6 फीसदी है तो ऐसा वित्त वर्ष 2019-20 की 5 फीसदी की विकास दर की वजह से है, जो वित्त वर्ष 2018-19 में रही 6.1 फीसदी की विकास दर से भी कम थी।
क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘सरकार ने बजट को रफ्तार देने के लिए कुछ ही उपाय किए हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर से अल्पकालिक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद नहीं है।’ एजेंसी ने आगाह किया, प्रोत्साहन के अभाव में वित्त वर्ष 2020-21 में विकास दर मुख्य रूप से बेस इफेक्ट की वजह से दिखेगी और इसे कुछ हद तक बेहतर कृषि आय (अच्छी रबी फसल की वजह से), मौद्रिक रियायत में देरी से समर्थन मिलेगा।