मुरादाबाद के राठौर परिवार को अंतराष्ट्रीय स्तर का अवार्ड हासिल हो सकता है। नए शोध के मामले में विश्वस्तरीय संगठन जी20 के जरिए प्रदान किए जाने वाले अवार्ड के अंतिम राउंड में पहुंची हैं। वैसे तो शोध में पूरा राठौर परिवार संलिप्त है मगर असली मेहनत प्रतिभा राठौर का है। प्रतिभा ने नई तकनीक के रूप में FUTURISTIC SAFE INJECTION SYSTEM-2020 विकसित किया है। जोकि इंजेक्शन के बजाय शरीर में दवाई पहुंचाने के काम आएगी। राठौर परिवार का यह शोध नई खोजों के शीर्ष 5 शोधों में नंबर दो पर है। वोटिंग के जरिए इसे दुसरा स्थान हासिल हुआ है। विजेता का चयन करने से पहले शोधों पर तकनीकी विशेषज्ञों की राय अहम रहेगी।
225 शोधों में शीर्ष 5 में पहुंचा है मुरादाबाद की बेटी का शोध।
मुरादाबाद की बेटी प्रतिभा की इंजेक्शन के विकल्प के रूप में नई तकनीक की शोध दुनिया के नवीनतम 225 शीर्ष खोज परियोजनाओं में नंबर दो पर पहुंचा है। जी20 के प्लेटफार्म से मिलने वाले इस सम्मान में शीर्ष 5 शोधों को स्थान मिला है। जिसमें मुरादाबाद की बेटी का शोध दूसरे नंबर पर है। 14 जुलाई को अवार्ड के विजेता का एलान होना है। प्रतिभा के पिता बीसी राठौर ने उम्मीद जताई है कि नई शोध के मामले में जी20 का अवार्ड उनकी बेटी को ही मिलेगा। बीते 6 साल से दिल्ली में रह रहे बीसी राठौर ने अमर उजाला को बताया कि 225 शोधों में शीर्ष के 2 नंबर पर पहुंचने पर हमें गर्व है। अंतराष्ट्रीय संगठन जी20 के जरिए नीवनतम शोध परियोजनाओं को यूफॉरजी20 पुरस्कार दिया जा रहा है। इसमें हमें 32हजार वोट हासिल हुए हैं। उम्मीद है कि 14 जुलाई को घोषित होने वाले परिणाम में बाजी भारत के हाथ लगेगी। यह देश के लिए गर्व की बात होगी।
जी 20
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क्या है youforG20 पुरस्कार
जी 20 समूह देशों की बैठक के वक्त यह पुरस्कार दिया जाता है। जर्मनी ने पुरस्कार की शुरूआत कि है। नवीनतम शोध के मामले में पुरस्कार जीतने वाले या परियोजना से जुडे लोगों को जर्मन दूतावास के जरिए 15000यूरो की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाती है। इस राशि को शोध के विस्तार पर खर्च किए जाने का प्रावधान है। यदि राठौर परिवार को यह पुरस्कार हासिल होता है तो उसे जर्मनी दूतावास के जरिए यह राशि मिलेगी।
जानिए राठौर परिवार को
इस तंत्र को पूरी तरह से विकसित करने में पूरा राठौर परिवार लगा हुआ है। मगर इसमें अहम भूमिका बीसी राठौर की बडी बेटी प्रतिभा राठौर की है। नैनोतकनीक में एमटेक की पढाई करने के बाद वे इस परियोजना के विस्तार के साथ सिविल सेवा के परिक्षा की तैयारी कर रही हैं।
राठौर का कहना है कि उनके इस शोध को अंतराष्ट्रीय पेटेंट भी प्राप्त हो गया है। उन्होंने विश्व बैंक और यूनाईटेड नेशन से भी आग्रह किया है कि वे आम लोगों की भलाई के लिए उनके इस शोध का इस्तेमाल करें। उन्हें इससे कोई अर्थिक लाभ नहीं लेना है। राठौर परिवार में जय हिन्द राठौर, भारती राठौर, प्रतिभा राठौर, डा निलम राठौर और बीसी राठौर के रूप में पांच सदस्य हैं।
क्या है फ्यूचरीसटीक सेफ इंजेक्सन सिस्टम—2020
इंजेक्शन के बजाय शरीर में दवा पहुंचाने का ये एक तरीका है। इसमें शरीर में नीडल लगाने की आवश्यक्ता नहीं पडेगी। प्रतिभा राठौर का कहना है कि असुरक्षित इंजेक्शन के इस्तेमाल से कई नई बिमारियां एक—दूसरे के शरीर में फैलती हैं। उपर से बायोमेडिकल उत्पाद पर्यावरण के लिए खतरा बने हुए हैं। इंजेक्शन का बडा बाजार है।
मगर सुरक्षा पैमाने पर पूरी तरह खडे नहीं उतर पाए हैं। 21 मिलियन हेपेटाईटिस बी, 21 मिलियन हेपेटाईटिस सी और 2,60,000 एचआईवी और एडस सरीखे तमाम हस्तांतरित होने वाली बिमारियों से लोग ग्रस्त हैं। इन बिमारियों से ग्रसित होकर मरने वालों की सालाना संख्या 1.3 मिलियन के करीब है। नए शोध से गलत इंजेक्सन की वजह से होने वाली बिमारियों से छूटकारा मिूलेगा। पर्यावरण को भी लाभ रहेगा।