भाजपा के वैचारिक संरक्षक कहे जाने वाले राष्ट्रीय स्वसंसेवक संघ ने भी अब भाजपा की आलोचना करना शुरू कर दिया है। आरएसएस की मजदूर और किसान शाखा, भारतीय मजदूर संघ और भारतीय किसान संघ ने सरकार पर खेती और सेवाओं के क्षेत्र में संकट को कम करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा दोनों संघों ने नीति आयोग को भी किसान और मजदूर विरोधी बताया है।
दोनों संगठन चाहते हैं कि सरकार अपनी उन आर्थिक और कृषि नीतियों पर फिर से विचार करे, जो उसे एफडीआई और विनिवेश से दूर करती है। इसके अलावा संघों ने कहा कि सरकार को नीति आयोग की किसान और मजदूर विरोधी सुझावों को भी स्वीकार नहीं करना चाहिए।
मंदसौर में किसानों के विरोध के बारे पर भारतीय किसान संघ चौकस है, जहां हिंसा के बाद पुलिस गोलीबारी में पांच लोग मारे गए थे। शाखा ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे तेज उपाय की पेशकश नहीं की जाती जब तक देश में किसानों की स्थिति बदतर ही रहेगी।
किसान संघ का कहना है कि उनके सदस्य मौजूदा आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं। किसान संघ ने कहा कि संघ से जुड़े किसान गुस्सा तो हैं, लेकिन किसी भी हिंसा में शामिल नहीं हैं।