राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 1942 और उसके बाद अंग्रेज सरकार ने संघ की जासूसी कराई थी। अंग्रेज सरकार के पास इस बात का आंकड़ा रहता था कि संघ की किस शाखा में कितने स्वयंसेवक आते हैं। सरकार के अधिकारियों ने उसे यह रिपोर्ट दी थी कि अपने शुरुआती समय के कारण संघ उस समय सरकार के लिए बड़ा खतरा नहीं था, लेकिन उनका मानना था कि लोगों की संख्या बढ़ने पर संघ अंग्रेजी सरकार के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। संघ प्रमुख ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से संघ को दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ करार दिया था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर समाज को सुधारना है तो 50 प्रतिशत आबादी को अलग नहीं रखा जा सकता। उन्होंने साफ किया कि आरएसएस में महिलाओं की भूमिका को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब यही है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पहले से है और यह आगे और बढ़ेगी।
भागवत ने बताया कि आरएसएस महिलाओं के संगठन राष्ट्र सेविका समिति के साथ मिलकर काम करता है। यह संगठन 1936 में महिलाओं के लिए बनाया गया था और RSS की तरह समानांतर रूप से काम करता है। उन्होंने कहा कि समिति की 43 पूर्णकालिक महिला कार्यकर्ता (प्रचारिका) हैं और उनका काम तेजी से बढ़ रहा है। हर साल होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में समिति और अन्य संगठनों की महिला प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है।
भागवत ने कहा कि बैठक में महिलाएं सभी चर्चाओं में भाग लेती हैं और जब महिलाओं से जुड़े विषयों पर निर्णय लेना होता है, तो वही निर्णय करती हैं और हम उसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि अब महिलाएं आरएसएस के कई विभागों में इम्प्लीमेंटेशन ग्रुप्स में भी काम करने लगी हैं और आने वाले समय में इनकी भागीदारी और बढ़ेगी।