नेता जी सुभाष चंद्र बोस के द्वारा देश की पहली अस्थाई सरकार बनाने की 75वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने लालकिले पर तिरंगा झंडा फहराया। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इसे पीएम का एक और चुनावी स्टंट बताया और कहा कि अगर वे सुभाष चंद्र बोस का सम्मान करना चाहते हैं तो उन्हें अंडमान निकोबार द्वीप समूह का नाम नेता जी के नाम पर कर देना चाहिए जिसे उन्होंने जापान से आजाद कराया था। वहीं भाजपा ने प्रधानमंत्री के इस कदम को उनके उसी व्यवहार का एक हिस्सा बताया जिसके तहत वे देश के हर बड़े नेता को समय-समय पर याद करते रहते हैं।
कांग्रेस के शीर्ष नेता राशिद अल्वी ने अमर उजाला से कहा कि आज बोस का सम्मान करने का ‘नाटक’ करने वाले लोग वही हैं जो आजादी के दौरान उनका विरोध कर रहे थे। उनके मुताबिक हिन्दू महासभा ने आजादी के दौरान सुभाष चंद्र बोस का विरोध किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज सुभाष चंद्र बोस की याद महज इसलिए आ रही है क्योंकि चुनाव नजदीक आ गये हैं।
उन्होंने कहा कि सत्ता के साढ़े चार साल तक उन्हें सुभाष बाबू की याद नहीं आई थी। अगर पीएम मोदी सुभाष चंद्र को असली सम्मान देना चाहते हैं तो उन्हें अंडमान निकोबार द्वीप समूह का नाम नेता जी के नाम पर कर देना चाहिए जो उनकी राजनीतिक सफलता की पहचान है।
सीपीआई नेता अतुल अंजान ने आरोप लगाते हुए कहा कि लालकिले को प्राइवेट कम्पनी के हाथों ‘गिरवी’ रख देने वाले प्रधानमंत्री राष्ट्रीय स्मारकों का दुरूपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी लालकिले में जब शाहनवाज ढिल्लो के ऊपर मुकदमा चलाया गया और उन्हें फांसी देने की प्रक्रिया शुरू की गयी थी, तब यही आरएसएस अंग्रेजी सरकार के साथ खड़ी थी। उन्होंने कहा कि भाजपा को इसका कोई राजनीतिक लाभ पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान नहीं मिलने वाला।
वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा के महिला मोर्चा की अध्यक्ष रह चुकीं रूपा गांगुली ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी हमेशा महात्मा गांधी, अंबेडकर, लालबहादुर शास्त्री, सरदार पटेल जैसी हस्तियों का सम्मान करते रहते हैं। इसलिए उनके हर कार्यक्रम को चुनावी राजनीति से जोड़कर देखना संकीर्णता होगी।