बाबा जयगुरुदेव और सुभाष चंद्र बोस के नाम पर लोगों को बरगलाकर एक बड़ा संगठन बनाने और जवाहर बाग पर कब्जे का ख्वाब देखने वाला रामवृक्ष अपनी पंचायत लगाता था। ये पंचायत भी नक्सलियों की तर्ज पर लगती थी। जवाहर बाग में रहने वाले कब्जाधारी हों या उसके बाहर रह रहे समर्थक ये अपनी शिकायत लेकर थाने या चौकी नहीं, बल्कि उसकी पंचायत में जाते थे। प्रेमी जोड़ों को उसके आदेश पर यातनाएं दी जाती थीं। जवाहर बाग से बाहर भी जब कोई ऐसा मौका आता तो वह फोन पर हुक्म देता और गुर्गे उसका पालन कराते थे।
लंबे समय तक बाबा जयगुरुदेव का शिष्य रहने वाला रामवृक्ष गांवों में जाकर बड़ी बड़ी पंचायतें करता था। झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के कन्नौज, कुशीनगर, बरेली, बदायूं, अलीगढ़, देवरिया, बुलंदशहर, कानपुर, मुजफ्फरपुर, महोबा समेत कई जिलों के गांवों में उसके संगठन से जुड़े लोग थे। बताया जाता है कि उससे जुड़े लोग समस्याओं के लिए पुलिस के पास न जाकर उसके समक्ष पेश होते थे। वह बाकायदा पंचायत लगाता और फैसले सुनाता था। रामवृक्ष फोन पर भी फरमान जारी कर देता था। आपरेशन जवाहर बाग के बाद रामवृक्ष के कब्जे से छूटे लोग अब इस बारे में खुलकर बताते हैं।
यहां एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती झारखंड निवासी देवीदत्त ने बताया कि एक व्यक्ति की लड़की का प्यार गांव में ही पड़ोस के लड़के से हो गया था। रामवृक्ष तक बात पहुंची थी। रामवृक्ष ने अपने लोगों से कहा कि लड़की के बाल कटवा दो और लड़के का मुंह काला करो। उसके आदेश पर दोनों को सजा दी गई थी।