नीति आयोग के एक सदस्य रमेश चंद ने कहा, अगर तीनों कृषि कानून वापस होते हैं तो किसी भी सरकार में यह साहस नहीं होगा कि वह इसे फिर 10-15 साल में फिर ले आए। उन्होंने कहा, किसानों और सरकार के बीच मौजूदा गतिरोध अहं का टकराव है।
उन्होंने कहा, कृषि का मुद्दा अब बेहद जटिल हो चुका है। इसमें सुधारों की जरूरत है, इससे हर कोई सहमत होगा। उन्होंने कहा, अगर कानून वापस हुए तो यह कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए बेहद नुकसानदायक होगा। सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के लिए लचीला रुख अपनाया है। अभी कृषि क्षेत्र को निर्यातोन्मुख होने की जरूरत है। इससे प्रतिस्पर्धी क्षमता बढे़गी।