केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (फाइल फोटो)
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केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने आरोप लगाया है कि जेएनयू में एससी व एसटी शिक्षकों, छात्रों और अधिकारियों के साथ भेदभाव हो रहा है। जेएनयू के एससी, एसटी शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद उन्होंने यह बयान दिया। इस पर पासवान ने एक साथ चार ट्वीट करके आरोप लगाए। हालांकि, देर शाम वे अपने बयान से पलट गए और कहा कि एचआरडी मंत्री से बात हो गई है। शिक्षकों की इस दिक्कत का समाधान किया जाएगा। सरकार एससी व एसटी के हितों के लिए कटिबद्ध है।
रामविलास पासवान ने शनिवार को ट्वीट में लिखा कि शनिवार को जेएनयू के अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के शिक्षकों के शिष्टमंडल ने उनसे मुलाकात की और इस वर्ग के छात्रों, शिक्षकों और अधिकारियों के साथ हो रहे भेदभाव से अवगत कराया। दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि जेएनयू प्रशासन द्वारा एडमिशन की सीटों में कटौती और फीस वृद्धि से सबसे अधिक एससी-एसटी वर्ग के विद्यार्थी ही प्रभावित हो रहे हैं।
जेएनयू में एससी-एसटी वर्ग के शिक्षकों को प्रमोशन में निर्धारित योग्यता के बावजूद रिजेक्ट किया जा रहा है। तीसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि शिष्टमंडल ने बताया कि जेएनयू के एससी-एसटी के शिक्षकों की नियुक्तियों में योग्य अभ्यर्थियों को भी अयोग्य करार देकर पद खाली छोड़े जा रहे हैं। शिष्टमंडल के आरोप गंभीर हैं। इन पर ध्यान देना होगा।
वहीं, शनिवार देर शाम तीन ट्वीट करके उन्होंने बयान में बदलाव किया। इसमें लिखा है कि जेएनयू मुद्दे पर एचआरडी मंत्री से बात हुई है। उन्होंने बताया कि एडमिशन की सीटों में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है और प्रस्तावित फीस वृद्धि पर भी रोक लगा दी गई है। एचआरडी मंत्री ने शिक्षकों की दिक्कतों को शीघ ही सुलझाने की बात कही है। हमारी सरकार एससी-एसटी के हितों के लिए कटिबद्ध है। कटौती की बात तो दूर, उनके हितों को बढ़ावा देने हेतु सरकार कृतसंकल्प है। मैं अभी पटना में हूं। दिल्ली जाकर शीघ्र ही मंगलवार या बुधवार को एचआरडी मंत्री से बात करके इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा।
कैंपस में भी गरमाई सियासत
केंद्रीय मंत्री पासवान के ट्वीट और बाद में पलटने से कैंपस में भी सियासत गरमा गई है। जेएनयू प्रशासन ने शनिवार देर शाम भेदभाव के आरोपों को निराधार बताया। रजिस्ट्रार प्रो. प्रमोद कुमार के मुताबिक, ये सारे आरोप गलत हैं। विश्वविद्यालय में किसी एससी-एसटी शिक्षक, विद्यार्थी या अधिकारी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जातौ। दाखिले के दौरान भी कोई भेदभाव नहीं होता।