लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना
वर्ष 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) बनाने के लिए पासवान जनता दल से अलग हो गए। 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद, पासवान यूपीए सरकार में शामिल हो गए और उन्हें रसायन और उर्वरक मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री बनाया गया।
फरवरी 2005 में बिहार में किंग मेकर के रूप में उभरे
फरवरी 2005 के बिहार राज्य चुनावों में, पासवान की पार्टी एलजेपी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। परिणाम यह हुआ कि कोई भी विशेष दल या गठबंधन अपने आप सरकार नहीं बना सका। हालांकि, पासवान ने लालू यादव का समर्थन करने से लगातार इनकार किया।
छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का रिकॉर्ड
लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान के नाम छह प्रधानमंत्रियों की कैबिनेट में मंत्री के तौर पर काम करने की शानदार उपलब्धि जुड़ी है। 1989 में जीत के बाद वह वीपी सिंह की कैबिनेट में पहली बार शामिल किए गए और उन्हें श्रम मंत्री बनाया गया। एक दशक के भीतर ही वह एचडी देवगौडा और इंद्र कुमार गुजराल की सरकारों में रेल मंत्री बने।
1990 के दशक में जिस ‘जनता दल’ धड़े से पासवान जुड़े थे, उसने भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का साथ दिया और वह संचार मंत्री बनाए गए और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में वह कोयला मंत्री बने। इसके बाद 2004 में यूपीए से जुड़ गए तथा मनमोहन सिंह के अंदर काम किया। फिर 2014 में प्रधान मंत्री मोदी के कैबिनेट में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कार्यभार संभाला।
वर्ष 2014 के चुनाव में यूपीए से अलग होकर एनडीए में शामिल हो गए
यूपीए-2 के कार्यकाल में कांग्रेस के साथ उनके रिश्तों में तब दूरी आ गयी जब 2009 के लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद उन्हें मंत्री पद नहीं मिला और इस दौरान पासवान अपने गढ़ हाजीपुर में ही हार गए थे। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने उन्हें लड़ने के लिए सात सीटें दी। लोजपा छह सीटों पर जीत गयी
चुनावी मिजाज भांपने में माहिर
राम विलास पासवान चुनावी मिजाज भांपने में माहिर थे। चुनाव होने से पहले उन्हें अंदाजा लग जाता था कि कौन सा गठबंधन उनके लिए उपयुक्त रहेगा