चिराग पासवान, राम विलास पासवान (फाइल फोटो)
सांसद पुत्र चिराग पासवान को अपनी सियासी विरासत सौंपने की राह पर खड़े लोजपा के मुखिया रामविलास पासवान के खुद ही बतौर कैबिनेट मंत्री शपथ लेने की संभावना है। दरअसल भाजपा को अपने दम पर हासिल प्रचंड बहुमत और पीएम नरेंद्र मोदी की इच्छा ने पासवान का समीकरण गड़बड़ा दिया है। पासवान की इच्छा इस चुनाव केबाद चिराग को पार्टी की विरासत सौंपने के साथ ही अपनी जगह मंत्रिमंडल में शामिल करा कर उनका सियासी कद बढ़ाने की थी।
भाजपा को अपने दम पर प्रचंड बहुमत हासिल होने के बाद लोजपा के समक्ष सिर्फ पासवान के रूप में कैबिनेट मंत्री का पद हासिल होने का विकल्प बचा। ऐसे में अगर पासवान अपनी जगह अपने पुत्र को मंत्रिमंडल में शामिल कराते तो उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा मिलता। फिर खुद पीएम मोदी चाहते हैं कि दलित राजनीति का बड़ा चेहरा होने के कारण उनकी नई टीम में खुद पासवान बतौर वरिष्ठ मंत्री शामिल हों। ऐसी स्थिति में पासवान पहले खुद शपथ ले कर भविष्य में अपनी जगह बतौर कैबिनेट मंत्री चिराग केलिए संभावनाएं तलाश सकते हैं।
इस बार किसी सदन के नहीं हैं सदस्य
लोकसभा चुनाव के पूर्व ही अस्वस्थ चल रहे पासवान ने अपनी राजनीतिक विरासत अपने पुत्र को सौंपने की तैयारी कर ली थी। इसी रणनीति के तहत वह खुद चुनाव नहीं लड़े और पुत्र को चेहरा बना कर पर्दे के पीछे उनकी मदद करते रहे। अब भावी योजना पासवान को राज्यसभा में लाने की है। वैसे भी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, स्मृति ईरानी और रविशंकर प्रसाद सहित राज्यसभा के 4 सदस्य लोकसभा चुनाव जीत चुकेहैं। पहले पासवान को असम से राज्यसभा भेजने की थी। अब चर्चा है कि उन्हें बिहार से प्रसाद की जगह राज्यसभा लाया जाएगा।
मनोज सिन्हा को मिलेगा दोबारा मौका
गाजीपुर से लोकसभा चुनाव हारे मनोज सिन्हा को भी पीएम मोदी की नई टीम में जगह मिलेगी। संभवत: उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। उन्हें स्मृति ईरानी की जगह राज्यसभा भेजा जाएगा। इसके अलावा जदयू को एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री का पद दिए जाने पर सहमति बनी है।