भाजपा के पास बिहार में अब इसके अलावा कोई चारा नहीं है। सीटों के बंटवारे में देरी करके भाजपा भी अपने खेमे में दरार का संदेश नहीं देना चाहती। पार्टी के रणनीतिकार मानकर चल रहे हैं कि इस तरह के संदेश से पार्टी को लेकर संशय की स्थिति बढ़ रही है। इससे भाजपा को नुकसान हो रहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इसलिए अगले एक दो दिन में स्थिति साफ हो जाने की पूरी उम्मीद है। भाजपा सहयोगी दल जद(यू) और लोजपा (लोक जनशक्ति पार्टी) के साथ सबकुछ ठीक कर लेगी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में हैं। दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से उनकी भेंट प्रस्तावित है। इस दौरान बिहार में सहयोगी दल, सीटों के बंटवारे आदि पर भी चर्चा होगी। माना जा रहा है कि इस दौरान भाजपा और जद(यू) दोनों अपने सहयोगी राम विलास पासवान का भी मन टटोलेंगी। एक वरिष्ठ सूत्र की माने तो अंतत: 17(भाजपा)+17(जदयू)+6(लोजपा)= 40 सीट पर सहमति बन जाने के पूरे आसार हैं। इसके अलावा लोजपा को एक राज्यसभा सीट का आश्वासन मिल सकता है।
नीतीश भी चाहते हैं लोजपा का साथ
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और भाजपा के कोटे से बिहार सरकार में मंत्री का मानना है कि कुमार भी पासवान का साथ चाहते हैं। सूत्र का कहना है कि भाजपा, जद(यू) और लोक जनशक्ति पार्टी मिलकर 2019 के लोकसभा चुनाव में सम्मानजनक सीटें लेकर आएंगी। यह पूछने पर कि क्या पासवान के एनडीए से अलग होने पर असर पड़ेगा तो सूत्र का कहना है कि ज्यादा तो नहीं लेकिन कुछ असर जरूर पड़ेगा। क्योंकि पासवान ऐसी स्थिति में कांग्रेस, राजद, जीतन राम मांझी की हम, उपेन्द्र कुशवाहा की रालोसपा के साथ चले जाएंगे। हालांकि वहां पासवान को वहां इतनी सीटें नहीं मिल पाएंगी।