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विश्व हिंदू परिषद के मॉडल पर ही बनेगा राममंदिर, पीएम मोदी के करीबी को निर्माण समिति की कमान

Thu, 20 Feb 2020 05:35 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राममंदिर ट्रस्ट की पहली बैठक में मंदिर आंदोलन से जुड़े महंत नृत्यगोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया। पीएम मोदी के पूर्व प्रधान सिचव नृपेंद्र मिश्र को मंदिर निर्माण समिति की कमान सौंपी गई है। विहिप नेता चंपत राय को ट्रस्ट का महासचिव और स्वामी गोविंद गिरि कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं।
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विहिप का राममंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अयोध्या में भगवान राम का मंदिर विश्व हिंदू परिषद के मॉडल पर ही बनेगा। हालांकि, मॉडल में मंदिर की ऊंचाई के आधार पर कुछ बदलाव संभव है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को पहली बैठक में विस्तार व सुरक्षा कारणों से शिलान्यास की तारीख तय नहीं हो पाई। इस पर अयोध्या में होने वाली दूसरी बैठक में मंथन होगा।

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बैठक में मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे महंत नृत्यगोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष, विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव व स्वामी गोविंद गिरि को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी और उनके पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र को मंदिर निर्माण समिति का चेयरमैन बनाया गया है। 

ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील के. परासरन के ग्रेटर कैलाश स्थित निवास पर हुई बैठक में नौ प्रस्ताव पारित किए गए। पहले महंत नृत्यगोपाल व चंपत राय को शामिल करने और अध्यक्ष व महासचिव बनाने का प्रस्ताव पास हुआ। इसके बाद, नृपेंद्र मिश्र के चयन पर मुहर लगी।

निर्माण के सभी निर्णय करेंगे नृपेंद्र

मंदिर निर्माण से जुड़े सभी निर्णय अब नृपेंद्र मिश्र करेंगे। अयोध्या में प्रस्तावित दूसरी बैठक की तिथि दो-तीन दिन में तय होगी। इसी बैठक में मिश्र निर्माण संबंधी रिपोर्ट रखेंगे।

मॉडल विहिप वाला ही रहेगा, लेकिन मंदिर  और ऊंचा व विस्तृत करने के लिए प्रारूप में थोड़ा बदलाव किया जाएगा। 

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-महंत नृत्यगोपाल दास, ट्रस्ट अध्यक्ष

 

राममंदिर और परिसर अन्य धर्मों के प्रतीक स्थलों से बड़ा होना ही चाहिए। सनातन धर्म सबसे प्राचीन धर्म है। भगवान राम इसके महानतम प्रतीक हैं। अतिरिक्त भूमि जुटाने की कोशिश की जाएगी। 
-स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती

 

दूसरी जगह विराजेंगे रामलला

निर्माण समिति जल्द ही अधिगृहीत भूमि का निरीक्षण करेगी। रामलला को अस्थायी रूप से अन्यत्र विराजित किया जाएगा। फिर जमीन को समतल करने का काम होगा। हालांकि संतों की इच्छा है कि यह विश्व का सबसे विशाल और भव्य मंदिर बने। इसके लिए वे 67 एकड़ से ज्यादा जमीन चाहते हैं।

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