राज्यसभा में खरगे ने सुनाया शेर
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आज से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है और इस दौरान दोनों सदनों की कार्यवाही भी शुरू हो गई। इस दौरान सबसे अधिक दिलचस्प नजारा राज्यसभा में देखने को मिला, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने शानदार अंदाज में नए सभापति जगदीप धनखड़ का स्वागत किया। खरगे ने एक मंझे हुए नेता की तरह धनखड़ की पहले तारीफ की और फिर शेर पढ़कर इशारे-इशारे में तंज भी कसा। खरगे ने धनखड़ को किसान पुत्र कहकर पुकारा। खरगे ने धनखड़ की तारीफ करते हुए कहा कि आप भूमि पुत्र हैं, संसदीय परंपराओं को आप बखूबी समझते हैं। राजस्थान विधानसभा और पश्चिम बंगाल में राज्यपाल रहे हैं। पढने लिखने में आपकी रूची है, आपकी रूपरेखा बेहद बड़ी है। खरगे ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि राज्यसभा के संरक्षक के रूप में आपकी भूमिका बाकी भूमिकाओं से काफी बड़ी हैं। आप जिस आसन पर बैठे हैं उसपर कई गणमान्य लोग बैठ चुके हैं।
राज्यसभा में खरगे ने सभापति धनखड़ को सुनाया शेर
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को शेर भी सुनाया। खरगे ने कहा कि ''मेरे बारे में कोई राय मत बनाना गालिब मेरा वक्त भी बदलेगा मेरी राय भी बदलेगी''। खरगे के शेर सुनाने के बाद उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुस्कुराने लगे और उन्होंने शुक्रिया अदा किया।
पहले सदन 100 दिन तक चलती थी लेकिन अब 60-70 दिन भी नहीं: खरगे
खरगे ने कहा कि एक समस्या यह है कि सदन की बैठकें कम होने के कारण जनता के मुद्दों पर चर्चा के लिए उचित समय नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा गरीबों, एसटी, एसटी, दबे-कुचलों, किसानों, अत्याचार की शिकार महिलाओं के हालात पर ढंग से बात नहीं रख पाते। उन्होंने कहा कि विधेयक भी जल्दबाजी में पारित किये जाते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहले जहां संसद 100 से अधिक दिन चलती थी वहीं अब यह 60-70 दिन से अधिक नहीं चलती। उन्होंने कहा कि यदि पिछले एक दशक के आंकड़े देखें तो सबसे अधिक 2012 में 74 बैठकें हुई थीं और इसके बाद 2016 में 72 बैठकें हुई थीं। उन्होंने सभापति के समक्ष यह उम्मीद जतायी कि चर्चा के लिए दिन बढ़ाए जाएंगे।
हमारे कानून पर जब न्यायाधीश टिप्पणी करते हैं तो अच्छा नहीं लगता: खरगे
खरगे ने कहा कि सभापति कानून के जानकार हैं और वह इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि यदि कानून को जल्दबाजी में पारित किया जाता है तो उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कानून की गुणवत्ता पर टीका टिप्पणी करते हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी संसदीय प्रणाली की सेहत और छवि के लिए ठीक नहीं लगता। उन्होंने कहा कि विधेयक पर ढंग से विचार करने के लिए उन्हें विभिन्न संसदीय समितियों के पास विचार के लिए भेजा जाना चाहिए। उन्होंने देश के पहले उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जल्दबाजी में कानून पारित करने से रोकने का काम राज्यसभा करती है।
पीएम मोदी ने भी दिलचस्प अंदाज में जगदीप धनखड़ की तारीफ की
राज्यसभा में पीएम मोदी ने नए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की जमकर तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा कि मैं इस सदन के साथ-साथ राष्ट्र की ओर से सभापति (उपराष्ट्रपति) को बधाई देता हूं। आप संघर्षों के बीच जीवन में आगे बढ़ते हुए इस मुकाम पर पहुंचे हैं, यह देश के कई लोगों के लिए प्रेरणा है। आप सदन में इस महती पद की शोभा बढ़ा रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे उपराष्ट्रपति किसान पुत्र हैं और उन्होंने सैनिक स्कूल में पढ़ाई की है। इस प्रकार वह जवानों और किसानों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आपके मार्गदर्शन में राज्यसभा अपनी विरासत को न केवल आगे बढ़ाएगी अपितु नई ऊंचाई भी देगी।