राज्यसभा में कृषि बिलों के विरोध में हंगामा करने पर निलंबित किए गए विपक्षी सांसद धरने पर बैठे हैं। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह ने संसद परिसर में धरने बैठे विपक्षी सांसदों को मंगलवार सुबह चाय पिलाई। हालांकि, रविवार को राज्यसभा में विपक्षी सांसदों के आचरण से दुखी हरिवंश खुद एक दिन के उपवास पर चले गए। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी सांसदों के बीच पहुंचकर उन्हें चाय पिलाने के लिए हरिवंश की जमकर तारीफ की। जबकि कांग्रेस ने चुनावी स्टंट करार दिया।
उपसभापति हरिवंश ने सांसदों के आचरण को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक चिट्ठी भी लिखी है। प्रधानमंत्री मोदी ने जदयू नेता हरिवंश की राष्ट्रपति को लिखी तीन पन्नों की चिट्ठी को ट्विटर पर शेयर करते हुए उनकी तारीफ की। पीएम ने लिखा, राष्ट्रपति को हरिवंश जी ने जो पत्र लिखा, उसे मैंने पढ़ा। पत्र के एक-एक शब्द ने लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था को नया विश्वास दिया है। यह पत्र प्रेरक भी है और प्रशंसनीय भी। इसमें सच्चाई भी है और संवेदनाएं भी। मेरा आग्रह है, सभी देशवासी इसे जरूर पढ़ें।
हरिवंश पर गरमाई बिहार की सियासत
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने हरिवंश के साथ हुए बर्ताव को राज्य में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़ दिया। दोनों नेताओं ने कहा कि चुनाव में बिहार की जनता इस अपमान का बदला जरूर लेगी। इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने हरिवंश के उपवास को चुनावी स्टंट बताया। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने ट्वीट किया, पीएम मोदी ने पूर्व में पूरे बिहार का डीएनए खराब बता दिया था। सत्ता पक्ष के लोग तो इस बात को भूल गए होंगे। लेकिन उनका यह शब्द बिहार को आज भी याद है।
हरिवंश ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी
अपने पत्र में हरिवंश ने लिखा, ‘20 सितंबर को राज्यसभा में जो कुछ हुआ, उससे पिछले दो दिनों से गहरी आत्मपीड़ा, तनाव और मानसिक वेदना में हूं। मैं पूरी रात सो नहीं पाया। जेपी के गांव में पैदा हुआ। सिर्फ पैदा नहीं हुआ, उनके परिवार और हम गांव वालों के बीच पीढ़ियों का रिश्ता रहा। गांधी, जेपी, लोहिया और कर्पूरी ठाकुर जैसे लोगों के सार्वजनिक जीवन ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। जयप्रकाश आंदोलन और इन महान विभूतियों की परंपरा में जीवन में सार्वजनिक आचरण अपनाया। मेरे सामने 20 सितंबर को संसद के उच्च सदन जो दृश्य हुआ, उससे सदन, आसन की मर्यादा को अकल्पनीय क्षति पहुंची है। सदन के सदस्यों की ओर से लोकतंत्र के नाम पर हिंसक व्यवहार हुआ। आसन पर बैठे व्यक्ति को भयभीत करने की कोशिश हुई। उच्च सदन की हर मर्यादा और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गईं। सदन में सदस्यों ने नियम पुस्तिका फाड़ी। मेरे ऊपर फेंका। आक्रामक व्यवहार, भद्दे और असंसदीय नारे लगाए गए। हृदय और मानस को बेचैन करने वाला लोकतंत्र के चीरहरण का पूरा नजारा रात मेरे मस्तिष्क में छाया रहा। इस कारण मैं सो नहीं सका।
प्रधानमंत्री ने क्या कहा
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, 'सदियों से बिहार की महान भूमि हमें लोकतंत्र के मूल्यों को सिखा रही है। उस अद्भुत लोकाचार के अनुरूप बिहार से राज्यसभा सांसद और राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश जी के प्रेरणादायक और राजनेता जैसे आचरण हर लोकतंत्र प्रेमी को गौरवान्वित करेंगे।'
उन्होंने कहा, 'व्यक्तिगत रूप से उन लोगों को चाय परोसना, जिन्होंने उन पर हमला किया और कुछ दिनों पहले उनका अपमान किया, दिखाता है कि श्री हरिवंश जी विनम्र मन और बड़े दिल वाले व्यक्ति हैं। यह उनकी महानता को दर्शाता है। मैं हरिवंश जी को बधाई देने के लिए भारत के लोगों के साथ हूं।'
अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के खिलाफ एक दिवसीय उपवास रखेंगे हरिवंश
वहीं, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण 20 सितंबर को कृषि विधेयकों के पारित होने के दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा सदन में उनके साथ किए गए दुर्व्यवहार के खिलाफ एक दिवसीय उपवास रखेंगे।
चाय पिलाने पहुंचे थे उपसभापति
गौरतलब है कि कृषि विधेयकों पर रविवार को राज्यसभा में विपक्ष के सांसदों द्वारा विरोध करते हुए माइक तोड़े गए और कुछ सांसद उपसभापति हरिवंश नारायण के पास वेल तक पहुंच गए। इस पर कार्रवाई करते हुए सभापति वेंकैया नायडू ने आठ सांसदों को निलंबित कर दिया।
इसके बाद से ही ये सांसद विरोध जताते हुए सोमवार से संसद परिसर में धरने पर बैठे हुए हैं। इसी बीच राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश मंगलवार को उनसे मिलने के लिए पहुंचे और उन्हें चाय दी। हालांकि, उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा, 'जब वे हमारे घर आएंगे तो हम व्यक्तिगत रिश्ते निभाएंगे लेकिन यहां हम किसानों के लिए बैठे हैं इसलिए ये व्यक्तिगत रिश्ते निभाने का वक्त नहीं है। हम चाहते हैं कि ये काला कानून वापस लिया जाए। देश के हजारों किसान भूखे-प्यासे सड़कों पर इस काले कानून के खिलाफ हैं।'