मगर भाजपा सभी का खेल बिगाड़ने की कोशिश करते हुए 9वें उम्मीदवार के तौर पर बिजनेसमैन अनिल कुमार अग्रवाल को राज्यसभा भेजने की जुगत में है। समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता नरेश अग्रवाल के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने से इस बात की चर्चा है कि उनका बेटा और सपा विधायक नितिन भाजपा के पक्ष में वोट कर सकता है। हरदोई सदर से विधायक नितिन ने हाल ही में योगी आदित्यनाथ द्वारा बुलाई गई भाजपा और उसके सहयोगियों की बैठक में शिरकत की थी।
भाजपा
भाजपा अपने सहयोगियों के अलावा निर्दलीय विधायकों, सपा, बसपा और कांग्रेस के नाखुश विधायकों से अपील कर रही है कि वह उनके पक्ष में वोट करें। हाल ही में भाजपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जिसके पास चार विधायक हैं उसने
योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए राज्यसभा में तटस्थ रहने की धमकी दी थी। जिसके बाद अमित शाह ने उन्हें फोन किया और मिलने के लिए बुलाया। इसके अलावा राजा भैया, विनोद सरोज, अमन मणि त्रिपाठी और विजय मिश्रा ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भाजपा का समर्थन किया था। इसलिए भाजपा राज्यसभा चुनाव में भी उनके समर्थन को हासिल करने के लिए कोशिशें कर रही है। अपने 9वें उम्मीदवार के लिए भाजपा के पास इस समय 28 वोट हैं जबकि उसे 9 और वोटों की जरूरत है।
कांग्रेस
कांग्रेस ने अपने चार बड़े नेताओं को राज्य में यह सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया है कि उनके विधायक बसपा के समर्थन में ही वोट करें। पार्टी के विधानसभा में सात विधायक हैं।
बसपा
बसपा ने भीमराव अंबेडकर को अपना राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। बसपा के पास राज्य में 19 विधायक हैं। उसे उम्मीदवार को जिताने के लिए 19 और विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के सात और राष्ट्रीय लोक दल के एक विधायक का समर्थन मिलने से मायावती की पार्टी एक उम्मीदवार को जिता सकती है।
सपा
समाजवादी पार्टी के पास प्रदेश में 47 विधायक हैं। वह जया बच्चन को संसद के ऊपरी सदन में भेज रही है। उसके पास 10 एक्स्ट्रा वोट हैं। जिसे वह बसपा के उम्मीदवार को दे सकती है। सपा के वरिष्ठ नेता और विधायक पारसनाथ यादव ने कहा कि हम जानते हैं चुनाव कैसे लड़ा जाता है। हमारा उम्मीदवार जीतेगा और हम इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि बसपा के उम्मीदवार की भी जीत हो।