केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट द्वारा दिए गए हाल के निर्णयों को सभी पर लागू नहीं किया जा रहा है। जिन कर्मियों ने अदालत में केस किया था, सरकार उन्हें ही पुरानी पेंशन व्यवस्था का फायदा दे रही है। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, छाया वर्मा, विशंभर प्रसाद निषाद और चौधरी सुखराम सिंह यादव 'पेंशन योजना के लिए मुकदमेबाजी', शीर्षक से राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा था।
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय एवं पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जवाब देते हुए कहा, दिल्ली उच्च न्यायालय के दिनांक 15 जनवरी 2021 के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एसएलपी 'विशेष अवकाश याचिका' दायर करने का निर्णय लिया गया है। केवल उन्हीं कर्मियों को पुरानी पेंशन का फायदा मिलेगा, जिनका परिणाम एक जनवरी 2004 से पहले आ चुका था, मगर उनकी ज्वाइनिंग इस तिथि के बाद हुई थी।
राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, छाया वर्मा, विशंभर प्रसाद निषाद और चौधरी सुखराम सिंह यादव ने 18 मार्च को पूछा था कि क्या दिल्ली उच्च न्यायालय ने डब्लू.पी.(सी) 8208/2020 और अन्य विभिन्न मामलों में 15 जनवरी 2021 को केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के अंतर्गत आने वाले उन कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना के तहत लाने का आदेश दिया है, जिनका चयन संबंधी परिणाम 31 दिसंबर 2003 के पश्चात घोषित किया गया था।
खास बात है कि इस भर्ती का विज्ञापन राष्ट्रीय पेंशन योजना के लागू होने से पहले जारी किया गया था। दूसरा सवाल, यदि ऐसा है तो उसका ब्यौरा क्या है। इस बाबत कोई कार्रवाई की गई है या नहीं। इन सांसदों का तीसरा और सबसे अहम सवाल यह था कि समान मामलों में सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट के हाल ही के निर्णयों के बावजूद उपर्युक्त के अनुसार सभी के लिए सामान्य आदेश जारी नहीं करने और अपने ही अधिकारियों को कार्यालय में उपस्थित होने के बजाए अनावश्यक मुकदमेबाजी करने के लिए मजबूर करने का क्या औचित्य है। चारों राज्यसभा सांसदों ने यह भी कहा कि इससे जनता के पैसे की बर्बादी हो रही है।
कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय एवं पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जवाब देते हुए कहा, नई अंशदायी पेंशन योजना (जो अब राष्ट्रीय पेंशन योजना हो गई है), आर्थिक कार्य विभाग द्वारा जारी दिनांक 22 दिसंबर 2003 की अधिसूचना द्वारा शुरू की गई थी। इसके अनुसार, नई योजना एक जनवरी 2004 से केंद्र सरकार में हुई सभी नई भर्तियों के लिए अनिवार्य थी। दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गई रिट याचिका संख्या 8208/2020 और कई अन्य रिट याचिकाओं में याचिकाकर्ता जून 2003 और सितंबर 2003 में जारी विज्ञापन तथा जनवरी 2004 में संपन्न हुई परीक्षा के आधार पर जून/जुलाई 2004 में उनके चयन के उपरांत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में विभिन्न पदों पर भर्ती हुए थे।
इसमें याचिकाकर्ताओं ने एक जनवरी 2004 से पूर्व पद के लिए जारी विज्ञापन के आधार पर पुरानी पेंशन योजना के लाभ को विस्तारित करने की प्रार्थना की थी। दिनांक 15 जनवरी 2021 के एक सामान्य आदेश में उच्च न्यायालय ने इन रिट याचिकाओं की अनुमति दे दी और प्रत्येक याचिकाकर्ता को पुरानी पेंशन योजना के लाभ विस्तारित करने का आदेश दिया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, कुछ अन्य मामलों में अदालतों के निर्णयों को देखते हुए और उन कर्मियों, जो एक जनवरी 2004 से पहले चयन होने पर एक जनवरी 2004 के पश्चात सरकारी सेवा में भर्ती हो पाए, इनकी शिकायतों का हल करने के लिए पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा 17 फरवरी 2020 को निर्देश जारी किए गए थे।
इनमें कहा गया कि उन सभी मामलों में, जहां दिनांक 31 दिसंबर 2003 या इससे पहले होने वाली रिक्तियों के सापेक्ष, भर्ती के लिए परिणाम दिनांक एक जनवरी 2004 से पूर्व घोषित किए गए थे, भर्ती के लिए सफल घोषित किए गए अभ्यर्थी केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के तहत कवर किए जाने के पात्र होंगे।
हालांकि दिनांक 22 दिसंबर 2003 की अधिसूचना और दिनांक 17 फरवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, रिक्तियों के लिए विज्ञापन की तिथि को पुरानी पेंशन योजना के तहत कवरेज के लिए पात्रता निर्धारित करने के मकसद से प्रासंगिक नहीं माना जाता। अत: रिट याचिका संख्या 8208/2020 और अन्य संबंधित रिट याचिकाओं में दिल्ली उच्च न्यायालय के दिनांक 15 जनवरी 2021 के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के समक्ष एसएलपी दायर करने का निर्णय लिया गया है।