बहरीन में चल रहे 146वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) असेंबली में राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने बुधवार को कोरोना महामारी के दौरान भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला। पात्रा ने 99 देशों और संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं को कोविड टीके प्रदान करने में भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए 'सबका साथ, सबका विकास, सबका का प्रायस' के सिद्धांत को उजागर किया।
पात्रा ने कहा कि भारत वसुधैव कुटुम्बकम् में विश्वास करता है जिसका अर्थ है 'विश्व एक परिवार है'। इसी विश्वास के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और समावेशी समाजों में भारत ने 99 देशों और संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं को 'मेक-इन-इंडिया' कोविड टीकों की 291 मिलियन (29.1 करोड़) से अधिक खुराकें प्रदान कीं। जिसमें 50 देशों और 150 देशों को समर्थन देने वाले संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को अनुदान के रूप में दी गई कोविड टीकों की 1.4 करोड़ से अधिक खुराकें शामिल हैं। पात्रा ने आगे कहा कि आज भारत 'सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास' के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। जिसका अर्थ है सभी के लिए भाईचारे की भावना, सभी का विकास, सबका विश्वास, सभी का समावेशी प्रयास और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का मंत्र।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र। प्राचीन काल से ही भारत को शांतिपूर्ण, सर्वोत्कृष्ट और समावेशी समाजों को बढ़ावा देने के लिए विश्व स्तर पर मान्यता दी गई है। राज्यसभा सांसद ने कहा, इसका तथ्य यह है कि भारत ने कभी किसी विदेशी देश पर हमला नहीं किया है और अपने आचरण में महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाया है और यह हमारे चरित्र को मजबूत करता है। भारत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में दृढ़ विश्वास करता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत लोकतंत्र, समावेशी समाज और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके अलावा भारत की संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में स्पष्ट रूप से भागीदारी है। 2,53,000 से अधिक भारतीयों ने दुनिया भर में विभिन्न संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सेवा दी है। पात्रा ने कहा कि सतत विकास के तहत लक्ष्य 16 को लेकर जहां तक हमारी उपलब्धि का सवाल है, भारत का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों की न केवल मौलिक अधिकारों तक पहुंच हो बल्कि उनका प्रभावी उपयोग हो। सतत विकास के तहत लक्ष्य 16 का उद्देश्य शांतिपूर्ण और समावेशी समाज को बढ़ावा देना है। इस दिशा में कानून, नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं के रूप में विभिन्न राष्ट्रीय पहलों को भारतीय संसद में पेश किया गया है।
अपने संबोधन के अंत में प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों से पात्रा ने कहा कि हमारे पास दुनिया भर के युवा सांसदों के रूप में वैश्विक शांति, स्थिरता और विकासात्मक प्रयासों की समावेशिता की दिशा में योगदान देने के लिए बहुत कुछ है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के युवा भारत को आदर्श मानते हैं। हमारी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। हम अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध हैं और उन लोगों के लिए जिम्मेदारी लेते हैं जिनका हम प्रतिनिधित्व करते हैं। आइए हम एक स्थायी, समावेशी, प्रगतिशील, शांतिपूर्ण, स्वस्थ और खुशहाल समाज के निर्माण के लिए एक साथ मिलकर काम करें।